विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासमी ने मंगलवार को इर्ना से बात करते हुए कहा, समस्त आतंकवादी गुटों के समर्थन और अपने भ्रामक विचारों के बावजूद बोल्टन ने 11 फ़रवरी को ईरान की इस्लामी क्रांति की 40वीं वर्षगांठ पर अपने सपनों पर पानी फिरते हुए देखा।
क़ासमी का कहना था कि बोल्टन ने इस्लामी क्रांति की मज़बूत स्थिति से कोई सीख लेने के बजाए फिर से पुरानी ग़लती दोहराई है और निराधार दावे किए हैं।
ग़ौरतलब है कि बोल्टन ने 2017 में पेरिस में आतंकवादी गुट एमकेओ के एक सम्मेलन में भाषण देते हुए दावा किया था कि ईरान की जनता इस्लामी क्रांति की 40वीं वर्षगांठ नहीं मना पायेगी।