6 फ़रवरी 2019 - 13:16
इतिहास ट्रम्प के बारे में क्या विचार स्थापित करेगा? परमाणु समझौता ख़त्म होने के बाद क्या रूस और अमरीका के बीच विनाशकारी प्रतिस्प

इतिहास अगर अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को याद करेगा तो केवल उनके सेक्स स्कैंडलों की वजह से याद नहीं करेगा बल्कि इसलिए भी याद करेगा कि उन्होंने अपने शासन काल में दो प्रमुख क़दम उठाए।

एक तो उन्होंने ख़ू आर्थिक प्रतिबंध लगाए और दूसरे उन्होंने जमकर समझौते तोड़े और जिसके नतीजे में शायद दुनिया की शांति भी ख़तरे पड़ जाए और शीत युद्ध वाला दौर फिर लौट आए और अगर लौटा इस बार इसकी प्रखरता पहले से ज़्यादा होगी। अतः यदि यह कहा जाने लगे कि ट्रम्प अमरीका के भीतर और बाहर सबसे कम लोकप्रियता वाले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दुनिया की तबाही की कगार पर नहीं बल्कि तबाही की गहराई में पहुंचा दिया तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

ईरान, रूस, वेनेज़ोएला  और सीरिया पर इसी तरह आशिंक रूप से पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा, चीन के ख़िलाफ़ व्यापारिक युद्ध का एलान बिल्कुल सामने के तथ्य हैं इनके लिए किसी विस्तार और साक्ष्य की ज़रूरत नहीं है। मगर बड़ा ख़तरा जिसने स्ट्रैटेजिक विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है और जिससे यूरोपीय सरकारें भी व्याकुल हो उठी हैं वह शुक्रवार की रात का अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प का फ़ैसला है। ट्रम्प ने एलान किया है कि वह रूस के साथ अमरीका के मीडियम रेंज के परमाणु मिसाइलों के समझौते से बाहर निकल रहे हैं। इस समझौते पर वर्ष 1987 में अमरीका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और रूस के राष्ट्रपति मीख़ाइल गोर्बाचोफ़ ने हस्ताक्षर किए थे।

इस फ़ैसले पर रूस की प्रतिक्रिया भी फ़ौरन आई। रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन ने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ और रक्षा मंत्री सर्गेई शुइगो के साथ मीटिंग के बाद शनिवार को घोषणा की कि रूस भी इस समझौते से तत्काल बाहर निकल रहा है और अब जो भी नतीजा होगा उसकी ज़िम्मेदारी अमरीकी प्रशासन की होगी इसमें असीमित परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा भी शामिल है।

इससे बड़ी बात यह हुई कि पुतीन ने मध्यम दूरी की मार करने वाले सुपर सोनिक मिसाइलों के उत्पादन को हरी झंडी दे दी और साथ ही अत्याधुनिक हथियारों के निर्माण संबंधी अध्ययन और परीक्षणों के लिए बड़े बजट के आवंटन का रास्ता भी साफ़ कर दिया।

पुतीन ने ट्रम्प को निशाना बनाकर एक बड़ा अर्थपूर्ण वाक्य भी कहा जिससे उनका राजनैतिक कौशल झलकता है। पुतीन ने कहा कि हम कुछ समय तक प्रतीक्षा करेंगे कि हमारे अमरीकी साथियों में इतनी परिपक्वता आ जाए कि उनके साथ इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में सार्थक बातचीत हो सके। इसका मतलब है कि रूसी राष्ट्रपति की नज़र में अमरीकी राष्ट्रपति के पास परिपक्वता का अभाव है। यह उस अमरीकी राष्ट्रपति का बहुत बड़ा अपमान है जो अमरीका को फिर से महान बनाने का बीड़ा उठा कर आगे बढ़े हैं।

500 से 5500 किलोमीटर की रेंज वाले मिसाइलों से संबिंधत समझौते को ख़त्म करना संभावित रूप से परमाणु हथियारों को कम करने संबंधी स्टार्ट समझौते को समाप्त करने की भूमिका हो जिसका समय फ़रवरी 2021 में पूरा हो रहा है और यह पुरी दुनिया के लिए ख़तरनाक स्थिति होगी।

राष्ट्रपति ने समझौते से बाहर निकलने के लिए जो तर्क दिए हैं कि मास्को इस समझौते का उल्लंघन कर रहा है वह संतोषजनक नहीं हैं। कहा जाता है कि अमरीका इस समझौते से इसलिए बाहर निकला है कि रूस को हथियारों की होड़ में शामिल करे ताकि रूस की अर्थ व्यवस्था ध्वस्त हो जाए जैसा कि इससे पहले सोवियत संघ के साथ हुआ था।

समझौते से अमरीका के बाहर निकलने से सबसे अधिक चिंता यूरोपीय महाद्वीप को है क्योंकि वह पहले ही ईरान के परमाणु समझौते से अमरीका के बाहर निकलने के नुक़सान से बाहर नहीं आ सका है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेडरीका मोग्रीनी ने अपने बयान में यह चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि हमारा महाद्वीप अमरीका और रूस की लड़ाई का मैदान बन जाए। यही बात अमरीकी प्रतिनिधि सभा की चेयरमैन नेन्सी पेलोसी ने कही। उन्होंने कहा कि ट्रम्प हथियारों की होड़ शुरू करवाना चाहते हैं जिससे अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है।

अमरीका को फ़र्स्ट बनाने की ट्रम्प की रणनीति एसी है जो अमरीका को लास्ट बना देगी क्योंकि इसमें परिपक्वता की भीषण कमी है। ट्रम्प ने अपनी रणनीति से अमरीका के सबसे क़रीबी घटकों अर्थात यूरोपीय देशों को भी ख़ुद से दूर कर दिया है और रूस तथा चीन से उसका सीधा मुक़ाबला शुरू हो गया है।

चीन केवल पूर्वी एशिया नहीं बल्कि मध्यपूर्व और अफ़्रीक़ा में भी अपना आर्थिक असर बढ़ रहा है। यह अमरीका के लिए ख़तरे की घंटी है। जब उत्तरी कोरिया के शासक किम जोंग उन अमरीका के लिए एक समस्या और गहरी चिंता का विषय बन गए हैं तो चीन के शक्तिशाली राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमरीका के सामने कितनी बड़ी मुशकिल खड़ी कर देंगे?

दूसरी बात यह है कि रूस अब गोर्बाचोफ़ के ज़माने वाला परास्त रूस नहीं बल्कि व्लादमीर पुतीन के शासन काल का शक्तिशाली रूस है। अब अगर हथियारों की होड़ शुरू हो गई तब भी रूस की अर्थ व्यवस्था तबाह होने वाली नहीं है क्योंकि उसने अपनी पिछली ग़लतियों से सबक़ सीख लिया है। सारी आशंकाएं अमरीका के लिए हैं जिस पर बुढ़ापा आ गया है और आशंकाएं तब और बढ़ जाएंगी जब ट्रम्प दूसरी बार भी राष्ट्रपति चुनाव जीतेंगे।

 

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार