बंदर का कहना था कि सऊदी अरब ने जेनेवा और सुल्दान बिन अब्दुल अज़ीज़ के महल में युद्ध के दोनों पक्षों के बीच गुप्त वार्ता में मध्यस्थता की थी।
सऊदी अरब की ख़ुफ़िया एजेंसी के पूर्व प्रमुख बंदर बिन सुल्तान ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी तेहरान यात्रा के दौरान अचानक ही आईआरजीसी की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी से भी मुलाक़ात की थी।
बिन सुल्तान का कहना है कि वह ईरान के वर्तमान संसद सभापति अली लारीजानी से मुलाक़ात करने के लिए तेहरान गए थे, लेकिन अचानक जनरल सुलेमानी से आमना-सामना हो गया, जिसके बाद मैंने उनसे भी संक्षिप्त मुलाक़ात की।
ग़ौरतलब है कि बंदर बिन सुल्तान उन सऊदी अधिकारियों में से हैं, जिन्हें सीरिया और इराक़ में तकफ़ीरी आतंकवाद के कट्टर समर्थकों में से समझा जाता है।
हालांकि उन्होंने क़तर की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि क़तर अपने ही जाल में ख़ुद फंस गया है, इस देश में अमरीकी सैन्य अड्डे के होने का मतलब क़तर सरकार को सुरक्षा प्रदान करना नहीं है, इसलिए कि अमरीका ने यह सैन्य अड्डा अपने हितों को साधने के लिए स्थापित किया है न कि क़तर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए।
बंदर बिन सुल्तान ने अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर लगाया कि वह क्षेत्र को 20 साल पीछे लेकर चले गए। उन्होंने कहा, सऊदी अरब के पूर्व किंग अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अज़ीज़ ने ओबामा से अपनी अंतिम मुलाक़ात में कहा था कि मुझे कभी भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि एक अमरीकी राष्ट्रपति मुझसे झूठ बोलेगा।