इस संदर्भ में जो आंकड़े आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। दुनिया में अरब पतियों की संपत्ति में प्रतिदिन ढाई अरब डालर की वृद्धि ही जा रही है जबकि आधी से अधिक आबादी की संपत्ति में गिरावट आ रही है।
सीएनएन की वेबसाइट पर प्रकाशित आक्सफ़ाम इंटरनैशनल की रिपोर्ट के अनुसार इस समय दुनिया में अरबपतियों की संख्या 2208 है जिनके पास इस समय जो दौलत है उसका अतीत में कोई उदाहरण नहीं है। लगभग एक दशक पहले जब अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंदी आई थी उसके बाद से अरबपतियों की संख्या लगभग दुगनी हो गई है।
डेवोस में वर्ल्ड इकानामिक फ़ोरम से पहले यह वार्षिक रिपोर्ट जारी की गई है। सालाना डेवोस आर्थिक फ़ोरम में दुनिया भर के धनवान और वित्तीय रूप से प्रभावी लोग एकत्रित होते हैं।
106 पृष्ठों की रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि दुनिया को अमीर और ग़रीब के बीच लगातार बढ़ते अंतर पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
दुनिया के सबसे धनवान 26 अरबपतियों की संपत्ति 1.4 ट्रिलियन डालर तक पहुंच गई और यह दुनिया की 3 अरब 80 करोड़ आबादी की कुल संपत्ति के बराबर है।
सबसे बड़े अरबपतियों में अधिकतर अमेरिकी हैं। आक्सफ़ाम ने फ़ोर्ब्ज़ द्वारा जारी की गई अरबपतियों की सूचि को अपनी रिपोर्ट में उद्धरित करते हुए यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें अमेज़न के जेफ़ बेज़स, माइक्रोसाफ़्ट के बिल गेट्स, बर्कशायर हैथावे के वारेन बफ़ेट और फ़ेसबुक के मार्क ज़ुकरबर्ग का नाम शामिल है। इनके पास कुल मिलाकर 357 अरब डालर की संपत्ति है।
आक्सफ़ाम का सुझाव है कि टैक्स व्यवस्था को बेहतर किया जाए और विश्व स्तर पर मुफ़्त स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, तथा सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं साथ ही इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि इसका बराबर लाभ महिलाओं और लड़कियों को भी मिल रहा है। यह भी सिफ़ारिश की गई है कि सार्वजनिक सेवाओं जैसे पानी, बिजली और चाइल्ड केयर में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत जैसे देश में जो तीव्र गति से विकास करने वाली अर्थ व्यवस्था का मालिक है, महिलाओं और लड़कियों को काम करने का अवसर बहुत कम मिल पाता है। हालांकि मैककिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट का कहना है कि यदि भारत में लिंग समानता पर ध्यान दिया जाए तो यह देश अपनी अर्थ व्यवस्था में 770 अरब डालर की वृद्धि कर सकता है जबकि एशिया महाद्वीप यदि महिलाओं को वर्कफ़ोर्स के रूप में प्रयोग करने की नीति पर अमल करे तो उसके सकल घरेलू उत्पादन में 4.5 ट्रिलियन डालर की वृद्धि हो सकती है।