रोएटर्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी सरकार मई में ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंध की समय सीमा बढ़ा देगी लेकिन इटली, यूनान व ताइवान जैसे देशों को मिली हुई छूट समाप्त हो सकती है ताकि चीन व भारत जैसे ईरान के तेल के मुख्य ख़रीदारों के क्रोध को शांत किया जा सके और इसी तरह तेल की बढ़ी हुई क़ीमत को भी कम करने की कोशिश की जा सके। वाॅशिंग्टन ने ईरान के तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद आठ देशों को इससे छूट दे दी थी और कहा था कि वे मई 2019 तक ईरान से तेल ख़रीद सकते हैं।
अमरीका अगर मई में तीन देशों को मिली हुई छूट ख़त्म भी कर देता है तो वह ईरान के तेल के निर्यात को शून्य तक पहुंचाने के अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकेगा क्योंकि भारत, चीन और तुर्की मुख्य रूप से ईरान का तेल ख़रीदते हैं और वे अमरीका की बात नहीं मानेंगे और अमरीका अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए उन्हें पुनः छूट देने पर विवश होगा। टीकाकारों का कहना है कि अमरीकी सरकार किसी भी तरह ईरान के तेल का संपूर्ण बायकाॅट नहीं कर सकती क्योंकि अगर एेसा हुआ तो तेल के मूल्य में बहुत ज़्यादा वृद्धि हो जाएगी और यह स्वयं अमरीका के हित में नहीं है। दूसरी बात यह है कि भारत, चीन व तुर्की जैसे देश ईरान के साथ अपने अच्छे संबंधों और तेल की आवश्यकताओं के दृष्टिगत अमरीका के प्रतिबंधों को अहमियत नहीं देंगे और अतीत में एेसा पहले भी हो चुका है।