यह बयान पहली बार होने वाली भारत- मध्य एशियाई वार्ता के बाद संयुक्त बयान में सामने आया। भारत की विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने अफ़ग़ानिस्तान, कज़ाक़िस्तान, क़िरक़िज़िस्तान, ताजेकिस्तान, तुर्कमनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के विदेमशंत्रियों के साथ वार्ता में भाग लिया।
ज्ञात रहे कि मध्य एशियाई देश शंघाई सहयोग संगठन के भी सदस्य हैं जिसकी सदस्यता भारत ने हाल ही में अपनाई है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि समस्त देशों ने हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा की और जनता और दुनिया भर की अर्थव्यववस्था के लिए इस ख़तरे का कारण बनने वाले आतंकवाद की रोकथाम में सहयोग करने का संकल्प दोहराया।
उनका कहना था कि समस्त देशों ने सुरक्षा, स्थिरता और विकास की स्थिति बेहतर बनाने के लिए परस्पर समर्थन, संयुक्त हल और अन्य मामलों में सहयोग को सुनिश्चित बनाया।
बैठक में भाग लेने वालों ने परस्पर व्यापार, पूंजीनिवेश बढ़ाने, उद्योग में गंभीरता, ऊर्जा, सूचना प्रद्योगिकी, फ़ारमास्यूटिकल, कृषि और शिक्षा के विस्तार के लिए अवसर प्रदान करने पर भी चर्चा की।