राजनीतिक टीकाकार इस यात्रा को राजनीतिक व आर्थिक आयामों से महत्वपूर्ण बता रहे हैं। विदेशमंत्री के साथ ईरान की कई कंपनियों के निदेशकों की उपस्थिति इस यात्रा के आर्थिक उद्देश्यों को उजागर करती है लेकिन यह एक हक़ीक़त है कि ईरान व भारत के संयुक्त आर्थिक व राजनीतिक हित हैं। भारत को अपने आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा की आवश्यकता है और ईरान भारत की इस ज़रूरत को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ईरान अप्रैल से जून 2018 तक भारत को तेल निर्यात करने वाला तीसरा बड़ा देश था। इसके साथ चाबहार ईरान व भारत के मध्य आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण व स्वर्णिम बिन्दु है और यही वजह है कि ईरानी विदेशमंत्री की इस यात्रा में चाबहार में सहयोग के विषय पर विस्तार से चर्चा होगी। चाबहार को अमरीका ने प्रतिबंधों से अलग रखा है। इस लिए इस क्षेत्र में ईरान व भारत के मध्य सहयोग, दोनों देशों के लिए लाभदायक है। दोनों देशों के व्यापारी इस क्षेत्र को बहुत बड़ा बाज़ार बना सकते हैं। भारत ईरान के दस सब से बड़े व्यापारिक सहभागियों में से एक है। भारत के वित्तमंत्रालय ने पिछले हफ्ते ईरान को अदा की जाने वाली तेल की कीमत पर टैक्स माफ कर दिया जिसकी वजह से भारत के तेल शोधक कारखाने ईरान को तेल की कीमत अदा कर सकेंगे। सऊदी अरब , यूएई और ओमान में भारत के पूर्व राजदूत तिलमीज़ अहमद कहते हैं कि हम भारत और ईरान के मध्य बढ़ते संबंधों को देख रहे हैं । ईरानी विदेशमंत्री की भारत यात्रा पर समीक्षात्मक नज़र डालना चाहिए। यह यात्रा ईरान के विदेशमंत्री को दोनों देशों के संबंधों के महत्व पर बल देने का अवसर प्रदान करेगी जबकि अमरीका यथावत निष्क्रिय है और ईरान के बारे में दोहरा रुख अपना रहा है। बहरहाल ईरान व भारत ने यह दर्शा दिया है कि वह अमरीकी दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसला करते हैं और दोनों देश संबंध विस्तार का संकल्प रखते हैं।
8 जनवरी 2019 - 12:30
समाचार कोड: 924042
इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं ।