6 जनवरी 2019 - 16:50
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर हंगामा मचाता रहा अमरीका जबकि ईरान ने तेज़ी से कर लिया अपनी नौसैनिक शक्ति में विस्तार, अमरीकी जलसीम

अमरीका ख़ुद को हर ख़तरे से सुरक्षित रखने के लिए दुनिया के कोने कोने में ठिकाने बनाने की कोशिश में लगा रहता है मगर इस बीच यह बड़ा परिवर्तन हुआ है कि अमरीकी जलसीमा के क़रीब रूस और चीन के बाद अब ईरान की नौसेना की हनक दिखाई दी है।

अमरीका में सैनिक मामलों के विशेषज्ञ इस सोच में पड़ गए हैं कि मिसाइल शक्ति बन जाने के बाद क्या ईरान ने अपनी नौसेना को असाधारण रूप से मज़बूत कर  लिया है।

कई वर्षों से ईरानी नौसेना ने यह ठोस क़दम उठाया कि अपनी जलसीमा के क़रीब अमरीकी युद्धपोतों को आने से रोक दिया। सितम्बर महीने में फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी विमानवाहक पोत थ्यूडर रोज़वेल्ट को ईरान की तेज़ रफ़तार छोटी नौकाओं ने चेतावनी दी। जबकि इस समय दूसरी बड़ी घटना यह हुई कि ईरान की नौसेना ने घोषणा की है कि एटलांटिक महासागर के पश्चिमी भाग में वह अपने युद्धपोत भेज रहा है। यह युद्धपोत मार्च महीने में इस जलक्षेत्र में पहुंचेंगे और कुछ हफ़्ता वहां गुज़ारेंगे। ईरान एक डिस्ट्रायर भी भेज रहा है जो युद्धक विमानों का मुक़ाबला करने तथा इलेक्ट्रानिक युद्ध की संभावनाओं से लैस है।

ईरान ने इससे पहले एलान किया था कि वह सहंद डिस्ट्रायर को अमरीकी जलक्षेत्रों के क़रीब भेज रहा है। ईरान के जहाज़ इस इलाक़े में पहुंच जाते हैं तो यह बहुत बड़ी घटना मानी जाएगी क्योंकि रूस और चीन के बाद ईरान तीसरा एसा देश होगा जिसके युद्धक समुद्री जहाज़ अमरीकी जलसीमा के क़रीब जाएंगे।

ईरान ने अब तक जिस सामरिक योजना की भी घोषणा कर दी है उसे पूरा ज़रूर किया है। इसी लिए विशेषज्ञों का कहना है कि तेहरान के नेताओं की ओर इस प्रकार के हर एलान की पुष्टि करना चाहिए। मगर विशेषज्ञों के बीच यह बहस चल रही है कि ईरान की नौसेना की शक्ति का वास्तविक स्तर क्या है? ईरान ने अपनी मिसाइल शक्ति में तेज़ी से विस्तार करके मध्यपूर्व में एक नया समीकरण खड़ा कर लिया है। ईरान ने हिज़्बुल्लाह जैसे अपने घटकों की मदद से इस्राईल के दांत खट्टे कर दिए हैं अतः वर्ष 2006 के युद्ध के बाद आज तक इस्राईल लेबनान के ख़िलाफ़ कोई नया युद्ध शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है हालांकि उसका दिल तो बहुत चाहता है कि युद्ध में हिज्बुल्लाह लेबनान को वह कमज़ोर कर दे।

यह विचार आम जो चुका है कि ईरान ने अपनी नौसेना की ताक़त मध्यम स्तर से काफ़ी बढ़ा ली है।

अमरीकी जल क्षेत्र के पास ईरान के युद्धपोतों पर नज़र रखना अमरीकी नौसेना के लिए कठिन काम नहीं है और अमरीका हो सकता है कि ईरानी जहाज़ों के ख़िलाफ़ कार्यवाही के बारे में सोचे मगर पेंटागोन को यह पता है कि ईरानी जहाज़ के ख़िलाफ़ कोई भी कार्यवाही हुई तो इसका जवाब फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में अमरीकी जहाज़ों को निशाना बनाकर दे सकता है।

वाशिंग्टन अब तक कई बार ईरान को युद्ध की धमकी दे चुका है जबकि ईरान ने कई बार अमरीकी सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया मगर पेंटागोन ने इस पर मौन धारण कर लिया, यहां तक कि डोनल्ड ट्रम्प जो किसी  भी मुद्दे पर बयान देते वक़्त आपे से बाहर हो जाते हैं, ईरान के मामले में बहुत सावधानी बरत रहे हैं।