फ़्रांस और ब्रिटेन की सरकारों सहित पश्चिम और उनके कुछ अरब घटकों ने 2011 में योरोपीय संघ के उभरने के बाद से अपने मद्देनज़र लक्ष्य साधने के लिए आतंकवाद से निपटने के बजाए दाइश सहित दूसरे आतंकवादी गुटों का समर्थन किया। जैसा कि पश्चिम एशिया मामलों के समीक्षक फ़्रेड्रिक पीशून, दाइश के प्रकट होने में अमरीका और फ़्रांस को ज़िम्मेदार मानते हैं।
पिछले कुछ साल में पश्चिम में दाइश के एक के बाद एक हमले के मद्देनज़र, अब योरोप अपने बुरे कर्म का अंजाम अपनी आंखों से देख रहा है। अब योरोप आतंकवादी ख़तरे से निपटने की कोशिश कर रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में योरोपीय आयोग ने कहा है कि इस संघ के सदस्य देश 28 दिसंबर से शेन्गन सूचना तंत्र को आतंकवाद के संदिग्ध लोगों के बारे में रिपोर्टे पेश करें ताकि उन सभी लोगों को सीमाओं पर गिरफ़्तार किया जा सके जो सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं।
बहुत से योरोपीय अधिकारियों ने संकटग्रस्त क्षेत्रों में दाइश की हार के मद्देनज़र योरोप पर उसके हमलों का ख़तरा होने की बात कही थी। इसलिए अब ऐसा लगता है कि दुनिया में ख़ास तौर पर योरोप अगले कुछ वर्ष लगातार आतंकवाद के ख़तरे से जूझता रहेगा। इसकी वजह आतंकवाद के संबंध में उसका दोहरा मानदंड और दाइश के प्रति उसका समर्थन है।