2009 का 30 दिसंबर का दिन, ईरानी जनता की दसियों लाख की संख्या में रैली में मौजूदगी की याद दिलाता है, जो दसवें राष्ट्रपति पद के चुनाव में धांधली के बहाने साज़िशकर्ता तत्वों और समाज में फूट डालने वालों से विरक्तता के एलान के लिए आयोजित हुयी थी।
आयतुल्लाह सय्यद अहमद ख़ातमी ने जुमे की नमाज़ के विशेष भाषण में सीरिया से अमरीकी सैनिकों के बाहर निकलने की ओर इशारा करते हुए कहा कि सीरिया से अमरीका का बाहर निकलना, इस देश के रक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा और सीरिया में कुछ क्षेत्रीय देशों के दूतावासों का फिर से खुलना, क्षेत्र में अमरीका की नीतियों की नाकामी को दर्शाता है।
उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के इराक़ के गुप्त दौरे को अमरीका की बेबसी के चरम का प्रतीक बताया और कहा कि क्षेत्र के ताज़ा हालात दर्शाते हैं कि सिर्फ़ प्रतिरोध से ही साम्राज्यवादियों का मुक़ाबला किया जा सकता है।
तेहरान के जुमे के इमाम ने इसी तरह यमन के हालात के बारे में कहा कि यमनी जनता घोर अन्याय से पीड़ित है और दुनिया के स्वतंत्रता प्रेमियों को चाहिए कि वे यमन पर अतिक्रमण करने वालों के ख़िलाफ़ ख़ामोश न बैठें।
आयतुल्लाह सय्यद अहमद ख़ातमी ने फ़्रांस के हालात की ओर भी इशारा किया और कहा कि पश्चिम का उदारवादी प्रजातंत्र पतन की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने इसी तरह हज़रत ईसा मसीह के शुभ जन्म दिवस और नए ईसवी वर्ष के शुभारंभ की बधाई देते हुए कहा कि दुनिया के ईसाइयों को चाहिए कि वे साम्राज्यवादियों से विरक्तता का एलान करें ताकि दुनिया में शांति व दोस्ती क़ायम हो सके