इस युद्ध से साफ़ जाहिर है कि नेतनयाहू इस समय किस गंभीर संकट में फंस गए हैं। वह लोगों का ध्यान अपनी ओर से हटाने की नाकाम कोशिश कर रहा हैं क्योंकि आर्थिक भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जांच का फंदा अब नेतनयाहू की गरदन के क़रीब पहुंच चुका है।
नेतनयाहू ने लेबनान की सीमा पर हिज़्बुल्लाह की सुरंगों का सारा ड्रामा इसी लक्ष्य के तहत किया और मीडिया स्टंट करके खुदाई करवाई, यही नहीं इस मामले की शिकायत लेकर वह संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भी पहुंच गए। जब सुरक्षा परिषद से हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ वह कोई निंदा प्रस्ताव पारित नहीं करा सके क्योंकि उनके पास एक भी ठोस सुबूत नहीं था तो अब नेतनयाहू ने तुर्क राष्ट्रपति के साथ शाब्दिक युद्ध छेड़ दिया है और बड़े घमंड भरे स्वर में बयान दे रहे हैं।
इस टकराव की शुरुआत नेतनयाहू ने की। उन्होंने तुर्की पर आरोप लगाया कि उसने उत्तरी साइप्रस पर क़ब्ज़ा किया, सीरिया के इफ़्रीन इलाक़े में कुर्द महिलाओं और बच्चों का नरसंहार किया जबकि इस्राईली सेना के बारे में कहा कि वह सारी दुनिया में सबसे अधिक शिष्टाचारी सेना है अतः इस सेना को अर्दोगान से उपदेश लेने की ज़रूरत नहीं है जो नागरिकों पर अंधाधुंध बमबारी करते हैं।
हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने तो नेतनयाहू के पूरे ड्रामे को बिल्कुल नज़रअंदाज़ कर दिया और इसे प्रतिक्रिया देने के क़ाबिल भी नहीं समझा अब जिसको जो अटकलबाज़ी करनी है करे। जहां तक तुर्क राष्ट्रपति अर्दोगान का सवाल है तो वह भलीभांति जानते हैं कि नेतनयाहू कुर्दों के अलगाववादी अभियान के समर्थक हैं। कुर्द तुर्की में भी रहते हैं जो तुर्की से अलग होकर एक देश बनाने की कोशिश में हैं अतः तुर्की की सरकार के लिए यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है। तुर्की अलग देश के लिए लड़ने वाले कुर्दों को आतंकवादी कहता है और उनके ख़िलाफ़ तुर्की के भीतर ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों में भी कार्यवाही करता रहता है। दूसरी ओर तुर्की फ़िलिस्तीन के हमास संगठन का समर्थन करता है जो इस्राईल के लिए डरावना सपना बन चुका है।
अर्दोग़ान ने बिल्कुल सही कहा कि नेतनयाहू अत्याचारियों के प्रतिनिधि हैं, सरकारी आतंकवाद कर रहे हैं, उन्हें किसी पर भी उंगली उठाने का अधिकार नहीं है।
इस्राईली सेना जिसे नेतनयाहू ने शिष्टाचारी सेना कहा वह हर शुक्रवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले फ़िलिस्तीनियों पर फ़ायरिंग करती है और वह गत 30 मार्च से अब तक अब तक 228 फ़िलिस्तीनियों की जान ले चुकी है और हज़ारों फ़िलिस्तीनियों को घायल कर चुकी है।
इस्राईली सेना और उसका महान शिष्टाचार आम नागरिकों के जनसंहार के समय बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और अब तो और भी ज़ाहिर हो जाता है जब उसके हमलों में डाक्टर और नर्सें मारी जाती हैं। गज़्ज़ा पट्टी पर जब इसी सेना ने हमला किया था तो उस समय वाइट फ़ासफ़ोरस का प्रयोग किया था जिसके कोई नहीं भूल सकता।
यही नहीं इस सेना के एक धर्मगुरू ने फ़तवा दिया था कि इस्राईली सैनिकों को अधिकार है कि युद्ध के समय फ़िलिस्तीनी महिलाओं और किशोरियों का बलात्कार करें। इस फ़तवे के सुबूत मौजूद हैं जिसका नेतनयाहू इंकार नहीं कर सकते। खेद की बात यह है कि सभ्य होने के दावे करने वाली पश्चिमी दुनिया नेतनयाहू का समर्थन करती है और उनके सारे अपराधों को नज़रअंदाज़ कर देती है।
हमारे मित्र और फ़िलिस्तीन के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री फ़रीह अबू मदयन ने बताया कि ग़ज़्ज़ा पट्टी के सामने इस समय एक बड़ी मुशकिल यह है कि नाकाबंदी से रोज़मर्रा की ज़िंदगी अजीरन हो चुकी है, ग़ज़्ज़ा पट्टी में एक लाख घर एसे हैं जो वर्ष 2014 में इस्राईली हमलों में ध्वस्त हो गए और अब तक उनकी मरम्मत नहीं हो सकी है। इसके साथ ही एक बड़ी समस्या यह है कि तीन हज़ार से अधिक युवा एसे हैं जो व्हील चेयर पर आ गए हैं। यह वह युवा हैं जो इस्राईली सेना के हमलों में घायल हुए और चूंकि इस्राईल ने इन पर प्रतिबंधित हथियारों का प्रयोग किया अतः डाक्टर उनके पांव काटने पर मजबूर हो गए इसकी वजह यह भी थी कि अस्पतालों में इन युवाओं के उपचार के लिए ज़रूरी दवाएं और उपकरण नहीं हैं। अब यह युवा उन शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं जहां औसतन एक कमरे में आठ लोग रहते हैं।
नेतनयाहू अपराधी प्रधानमंत्री हैं जो नस्लभेदी आतंकी शासन का नेतृत्व करते हैं जिसने फ़िलिस्तीन की धरती पर क़ब्ज़ा कर रखा है और जो इस्लामी धार्मिक स्थलों का यहूदीकरण कर रहा है। यह वह प्रधानमंत्री हैं जिनकी सेना के युद्धक विमानों ने तीन साल के भीतर सीरिया पर 200 से अधिक हमले किए और सैकड़ों बेगुनाह सीरियाई नागरिकों की जान ली।
हमने इस अतिग्रहणकारी शासन के अपराधों और अत्याचारों को झेला है अतः फ़िलिस्तीनी होने के नाते ज़रूरी है कि हम इन अपराधों से पर्दा उठाएं और इस अपराधी व्यक्ति के चेहरे से नक़ाब उठाएं जिसकी सेना घायल होकर ज़मीन पर गिर पड़ने वाले फ़िलिस्तीनियो को भी क़त्ल कर देती है और जिसके बाशिंदे मुहम्मद अबू ख़ज़ीर जैसे बच्चों को उनके घर को आग लगाकर ज़िंदा जला देते हैं।
इस नस्लभेदी अत्याचारी और आतंकी शासन को अपमानित और उसके चेहरे से नक़ाब हटाने की कोशिश में हाथ बंटाना सबसे ज़िम्मेदारी है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हम इस कोशिश का हिस्सा हैं।
आख़िर में हम यह कामना व्यक्त करना चाहेंगे कि राष्ट्रपति अर्दोगान इस्राईल के झूठे बयानों पर केवल जवाबी बयान न दें बल्कि इस आतंकी शासन से संबंध तोड़ने की कार्यवाही करें और उसके साथ हर प्रकार का आर्थिक लेनदेन रोक दें, क्या अर्दोगान अपने बयान पर अमल भी करेंगे।?