पाकिस्तान के शीया-सुन्नी धर्मगुरूओं ने इस्लाम के दुश्मनों के षडयंत्रों से मुकाबले के लिए मुसलमानों के मध्य एकता पर बल दिया।
नेहज़ते इस्लामी पाकिस्तान के प्रमुख अल्लामा साजिद अली नक़वी ने लाहौर में अहमद सलमान बलोच सहित जमाअते इस्लामी पार्टी के नेताओं से मुलाकात में मुसलमानों का आह्वान किया कि वे इस्लाम के दुश्मनों के षडयंत्रों पर पानी फेरने के लिए होशियारी से काम लें।
पाकिस्तान की जमाअते इस्लामी पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने भी बल देकर कहा कि साम्राज्यवादियों के षडयंत्रों को विफल बनाने के लिए मुसलमानों को एकजुट हो जाना चाहिये।
अहमद सलमान बलोच ने मुसलमानों के मध्य एकता पर बल देते हुए कहा कि शीया और सुन्नी धर्मगुरूओं को होशियारी से इन षडयंत्रों को विफल बनाना चाहिये।
शीया और सुन्नी दो नेताओं के मध्य होने वाली भेंट इस आयाम से महत्वपूर्ण है कि मुसलमानों की एकता के दुश्मन विशेषकर हालिया वर्षों में धर्मभ्रषट वहाबियों ने मुसलमानों के मध्य फूट डालने के अपने प्रयास में गति प्रदान कर दी है और सिपाहे सहाबा एवं लश्करे झंगवी जैसे आतंकवादी गुटों का समर्थन करके पाकिस्तान में अशांति व असुरक्षा का माहौल बना रखा है।
पाकिस्तान के शीया और सुन्नी मुसलमान एक दूसरे के साथ शांति पूर्ण ढंग से जीवन व्यतीत करते और एक दूसरे के धार्मिक मूल्यों का सम्मान करते रहे हैं।
यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि लगभग 80 के दशक में पाकिस्तान में सऊदी अरब और वहाबियों का प्रभाव विस्तृत रूप धारण किया और अब पाकिस्तान के अलावा पड़ोसी देश अफ़ग़ानिस्तान की सरकार और जनता के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।
पूर्व अमेरिकी सिनेटर बाब ग्रैहम ने आतंकवाद और हिंसा के विस्तार में सऊदी अरब की भूमिका के बारे में कहा कि सुन्नी अतिवादियों के समर्थन में सऊदी अरब की भूमिका की अनदेखी की जाती है जबकि अतिवादी और आतंकवादी गुटों के समर्थन में यह देश मुख्य भूमिका निभा रहा है।
अभी हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सऊदी अरब की यात्रा में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को वित्तीय सहायता देने का वादा किया था जिस पर पाकिस्तान के विद्वानों और धर्मगुरूओं ने इस देश में वहाबियों के प्रभाव के और अधिक हो जाने के प्रति चिंता जताई थी।
अरब अध्ययनकर्ता अबू फरास अलहमदानी हिंसा और आतंकवाद के विस्तार में सऊदी धर्मगुरूओं की भूमिका के बारे में लिखते हैं" अब यह स्पष्ट हो गया है और सब समझ गये हैं कि आतंकवाद का स्रोत सऊदी अरब है और वहां अब भी मध्ययुगीन शताब्दी जैसी सरकार है और सऊदी अरब क्षेत्र और विश्व में आतंकवादी व वहाबी फतवा केन्द्र है।