अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि ऐसा कार्य किया जाये जिससे स्पेस का प्रयोग सैन्य लक्ष्यों के लिए किया जा सके। इसी लक्ष्य से उन्होंने अमेरिका के रक्षामंत्री जेम्स मैटिस का आह्वान किया है कि वह किसी वरिष्ठ सैनिक अधिकारी के नाम का प्रस्ताव दें जिसे इस केन्द्र का कमांडर बनाया जाये।
अभी पिछले 18 जून को ट्रंप ने घोषणा की थी कि उन्होंने पेंटागोन को स्पेस सेना गठित करने का आदेश दिया था। अमेरिका की स्पेस सेना इस देश की थल, वायु और नौसेना के साथ काम करेगी।
अमेरिकी अधिकारियों विशेषकर ट्रंप का दावा है कि हालिया वर्षों में दुश्मनों की ओर से स्पेस चुनौतियों में वृद्धि हो गयी है और इस बहाने से वे स्पेस में युद्ध के आधुनिकतम हथियारों को स्थापित करने के प्रयास में हैं। ट्रंप ने एसी स्थिति में स्पेस में सैन्य केन्द्र बनाये जाने का आदेश दिया है जब रूस और चीन ने वर्षों पहले से स्पेस में अपने सैन्य केन्द्रों को मज़बूत करने का कार्य आरंभ कर रखा है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेन्स ने कहा है कि हमारे दुश्मनों की कार्यवाहियों से स्पष्ट हो गया है कि उन्होंने स्पेस को रणक्षेत्र में बदल दिया है और अमेरिका इस चुनौती से पीछे नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह काफी नहीं है कि अमेरिका स्पेस में केवल मौजूद रहे बल्कि स्पेस में हमारी श्रेष्ठता और वर्चस्व होना चाहिये।
स्पेस में अमेरिका की सैनिक गतिविधि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत चिन्ता उत्पन्न हो गयी है क्योंकि एक ओर वर्ष 1967 में होने वाले समझौते के आधार पर स्पेस समस्त मनुष्यों के लिए है न कि कुछ देशों के लिए और दूसरी ओर स्पेस में सैन्य विस्तार से देशों के मध्य सैनिक होड़ में वृद्धि होगी।
फ्रांस के वायुसेना प्रमुख जनरल फिलिप्पे लेवनी के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर स्पेस में हम युद्ध हार गये तो समस्त मोर्चों पर युद्ध हार जायेंगे।
बहरहाल अमेरिका स्पेस में अपना वर्चस्व बढ़ाने और स्पेस में प्रतिस्पर्धा में वृद्धि की चेष्टा में है और अगर स्पेस में युद्ध हुआ तो पूरी दुनिया से समस्त मानव जीवन का अंत हो जायेगा। इस आधार पर स्पेस की सुरक्षा और वहां युद्ध की रोकथाम के लिए प्रयास समस्त इंसानों की ज़िम्मेदारी है।