रविवार को होने वाली बैठक में सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने ईरान पर निराधार आरोप लगाया कि वह पड़ोसी देशों के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। यमन पर हमला और सीरिया तथा इराक़ सहित कई देशों में आतंकी संगठनों की मदद से छद्म युद्ध लड़ रहे सऊदी अरब के नरेश ने ईरान के ख़िलाफ़ घिसे पिटे आरोप दोहराए।
सऊदी नरेश ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वह फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के ढांचे की रक्षा को प्राथमिकता देते हैं हालांकि सऊदी अरब के वर्चस्ववादी रवैए के चलते इस संगठन का अस्तित्व ख़तरे में पड़ चुका है और अटकलें लगाई जा रही हैं कि क़तर इसी रवैए के कारण ओपेक के बाद फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद से भी बाहर निकल सकता है।
इस बैठक में बहरैन के नरेश हमद बिन ईसा ने क़तर की आलोचना की क्योंकि क़तर के अमीर शैख़ तमीम ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया वहीं क़तर ने तत्काल इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि क़तर उस शिखर बैठक में शामिल हुआ था जिसमें क़तर का परिवेष्टन करने वाले देश ग़ायब थे।
ज्ञात रहे कि दिसम्बर 2017 में कुवैत में जब इस संगठन की बैठक हुई थी तो उसमें क़तर के अमीर और कुवैत के अमीर ही उपस्थिति थे सऊदी अरब, इमारात और बहरैन ने निचले स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे थे। ओमान ने उप प्रधानमंत्री को भेजा था मगर यह सामान्य बात थी क्योंकि 2011 से ही ओमान नरेश सुलतान क़ाबूस शिखर बैठकों में शामिल नहीं होते।