7 दिसंबर 2018 - 16:01
ट्रम्प और पुतीन के बीच में बुरे फंसे बिन सलमान किसको नाराज़ करें किसका दिल जीतें?

तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक का सम्मेलन गुरुवार को वियेना में शुरू हो रहा है और यह सम्मेलन सऊदी अरब तथा वहां के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के लिए बहुत बड़ी चुनौती साबित होगा।

इसलिए कि बिन सलमान अपने पुराने घटक अर्थात अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और नए मित्र अर्थात रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन के बीच बुरी तरह ख़ुद को फंसा हुआ पाएंगे। ट्रम्प का इस बात पर ज़ोर है कि सऊदी अरब तेल के उत्पादन में कोई कमी न करे ताकि तेल की क़ीमतें कम रहें जबकि जी-20 के शिखर सम्मेलन में बिन सलमान से गर्मजोशी से मिलने वाले एक मात्र नेता पुतीन की मांग है कि सऊदी अरब उस अतिरिक्त एक मिलियन बैरल तेल का उत्पादन रोके जो उसने अमरीका की मांग पर बढ़ा दिया था और जिसके चलते अकतूबर में 86 डालर प्रति बैरल तक पहुंच जाने वाली तेल की क़ीमतें काफ़ी नीचे गिर गईं।

अगर वह पुतीन की बात मानते हैं तो ट्रम्प नाराज़ हो जाएंगे और ट्रम्प को खुश रखेंगे तो पुतीन को बुरा लगेगा। वैसे अमरीकी राष्ट्रपति को नाराज़ करना शायद सऊदी क्राउन प्रिंस को ज़्यादा महंगा पड़े क्योंकि वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में बिन सलमान बहुत बुरी तरह फंसे हुए हैं और ट्रम्प बड़ी मेहनत से बिन सलमान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं और इस चक्कर में उन्होंने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की रिपोर्ट पर भी विश्वास नहीं किया जिसमें बिन सलमान को इस हत्याकांड का ज़िम्मेदार माना गया है।

ट्रम्प ने बुधवार को एक बार फिर यह मांग दोहराई कि तेल के उत्पादन की मात्रा में कमी नहीं होनी चाहिए और इसके लिए उन्हें सबसे ज़्यादा भरोसा सऊदी अरब पर ही है जो प्रतिदिन 10.3 मिलियन बैरल की दर से तेल का उत्पादन कर रहा है। अमरीका को यह अपेक्षा है कि सऊदी अरब अन्य देशों को भी वर्तमान तेल उत्पादन स्तर को जारी रखने के लिए संतुष्ट करे और रूस को भी इसके लिए तैयार करे जो रोज़ाना 10.05 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है।

दो महीने में तेल की क़ीमतों में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई और यह कीमत 86 डालर प्रति बैरल से गिर कर 60 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। तेल की क़ीमतों में गिरावट की वजह यह है कि सऊदी अरब तथा कुछ अन्य अरब देशों ने तेल उत्पादन की मात्रा में 13 लाख बैरल की वृद्धि कर दी। इन देशों ने यह काम प्रतिबंधों के कारण ईरान के तेल निर्यात में आने वाली कमी पूरी करने के लिए ट्रम्प की मांग के अनुसार यह क़दम उठाया है। ट्रम्प ने सऊदी नरेश किंग सलमान को फ़ोन करके यह मांग की और सऊदी नरेश ने तत्काल यह मांग स्वीकार कर ली जिसके बाद ट्रम्प ने इस पर खुलकर अपनी पीठ भी थपथपायी।

राष्ट्रपति ट्रम्प चाहते हैं कि ईंधन की क़ीमतें कम रहें ताकि उनके दो साल के कार्यकाल में अमरीका में आर्थिक विकास का जो सिलसिला शुरू हुआ वह जारी रहे और वह अमरीका के भीतर अपने विरोधियों का मुंह बंद रख सकें। ट्रम्प को यह लगता है कि यदि तेल का उत्पादन कम हुआ तो इसकी क़ीमत बढ़ेगा और इसका असर सारी दुनिया विशेष रूप से अमरीका की अर्थ व्यवस्था पर पड़ेगा। अमरीका को सस्ते तेल की ज़रूरत है ताकि वह कटौती की नीति अपनाने से बचे और देश में मुद्रा स्फीति की दर भी न बढ़े।

सऊदी अरब की समस्या यह है कि तेल उत्पादन करने वाले अधिकतर देश ओपेक के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर यह मांग कर रहे हैं कि तेल की आमदनी बढ़ाने के लिए तेल उत्पादन में कमी करना ज़रूरी है और साथ ही उनका मानना है कि तेल उत्पादन में वृद्धि सऊदी अरब ने ही की है और इसी वजह से तेल की क़ीमतें गिरी हैं। यदि सऊदी अरब तेल उत्पादन की वर्तमान बढ़ी हुई मात्रा को जारी रखने पर अड़ा रहता है तो ओपेक के भीतर मतभेद बढ़ेगा और शायद क़तर के बाद दूसरे देश भी इस संगठन से बाहर निकल जाएं और यह संगठन ही समाप्त हो जाए।

अर्जेन्टीना में जी-20 के शिखर सम्मेलन के अवसर पर बिन सलमान और व्लादमीर पुतीन की मुलाक़ात से संबंधित जो जानकारी लीक हुई उसके अनुसार दोनों के बीच तेल उत्पादन की मात्रा कम करने पर सहमति बन गई है और तेल उत्पादन की मात्रा वहां तक पहुंचाई जाएगी जो गत सितम्बर महीने में थी या वर्ष 2016 में जो शेयर निर्धारित किया गया था उसके आधार पर तेल उत्पादन होगा। अब सवाल यह है कि क्या इस सहमति पर वियना बैठक में मुहर लगेगी? यदि तेल उत्पादन में कमी की जाएगी तो कितनी कमी की जाएगी? हिस्से का वितरण किस तरह होगा? या फिर ट्रम्प के रुख़ का समर्थन करने की सऊदी अरब की नीति के कारण यह सहमति विफल हो जाएगी?

इन सवालों के जवाब केवल तीन लोग जानते हैं, राष्ट्रपति पुतीन, राष्ट्रपति ट्रम्प और तीसरे मुहम्मद बिन सलमान। गुरुवार की रात तक बैठक का जो नतीजा आएगा उससे बहुत से समीकरण बदलेंगे।

बिन सलमान क्या पुतीन की ओर झुकेंगे या ट्रम्प की ओर उनका झुकाव होगा या वह दोनों को संतुष्ट करने की कोशिश करेंगे? दोनों को राज़ी रख पाना तो कठिन ही लगता है। इसलिए कुछ चौंकाने वाला दृष्य आने की संभावना है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के प्रख्यात लेखक व टीकाकार