ब्रायन हुक ने सोमवार को अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो के साथ ब्रसेल्ज़ जा रहे पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम यह देखना चाहते हैं कि यूरोपीय संघ ईरान पर एसे प्रतिबंध लगाए जिनसे ईरान का मिसाइल कार्यक्रम प्रभावित हो।
हुक ने कहा कि ईरान के मिसाइल ख़तरे के बारे में अमरीका और यूरोप समान विचार रखते हैं और यूरोपीय देशों को मालूम है कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव का उल्लंघन किया है।
एक सप्ताह पहले भी अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने कहा था कि ईरान ने मध्यम दूरी तक मार करने वाले बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है जो परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है।
वाशिंग्टन ने परमाणु समझौते से बाहर निकलने के वक़्त भी यह ड्रामा किया था कि रियाज़ पर यमन से कथित रूप से फ़ायर किए गए मिसाइल का एक टुकड़ा दिखाया और दावा किया कि ईरान ने यह मिसाइल यमन को दिया है अतः यमन को हथियार सप्लाई करने पर लगे संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिबंध का तेहरान द्वारा उल्लंघन किया गया है। यह सारा ड्रामा इसलिए था कि दुनिया भर के देश ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को ख़तरा समझने लगें मगर बहुत जल्द अमरीका का यह झूठ खुल गया।
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के एक प्रवक्ता फरहान हक़ ने बयान दिया कि यमन से सऊदी अरब पर फ़ायर किए गए मिसाइल के बारे में एसे ठोस प्रमाण नहीं हैं जिनसे साबित होता हो कि यह मिसाइल किस देश में बना है।
अमरीकी मैगज़ीन फ़ारेन पालीसी ने भी अपनी समीक्षा में लिखा कि वाइट हाउस ने जो साक्ष्य संयुक्त राष्ट्र संघ में रखे उनकी पुष्टि नहीं हुई है और मिसाइल के जिन टुकड़ों को दिखाया गया है वह अमरीका के बने हुए हैं।
ईरान के ख़िलाफ़ यह सारा प्रोपैगंडा एसी स्थिति में किया जा रहा है कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह से रक्षात्मक है।
वैसे भी ईरान ने मिसाइलों के बारे में अपना रुख़ साफ़ कर दिया है। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इमाम ख़ुमैनी की बर्सी के कार्यक्रम में भाषण देते हुए स्पष्ट शब्दों में यूरोप को संदेश दिया था कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कंट्रोल करने की बात वह सपना है जो कभी पूरा नहीं होगा।