2 दिसंबर 2018 - 16:09
डील आफ़ सेंचुरी फ़िलिस्तीन के ख़िलाफ़ वह अमरीकी योजना जो लागू होने से पहले ही अपनी मौत मर गई

लगभग एक साल से डील आफ़ सेंचुरी का नाम बार बार सुनने में आ रहा है जिसका संबंध फ़िलिस्तीन से है। यह योजना वैसे तो अमरीका की है लेकिन कहा जाता है कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिन यामिन नेतनयाहू इसके मूल सूत्रधार हैं और उनकी सलाह से अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के सलाहार और उनके दामाद जेयर्ड कुशनर ने यह योजना तैयार की थी।

योजना का एलान तो नहीं किया गया लेकिन इसके बारे में जानकारियां जान बूझ कर लीक की गईं ताकि प्रतिक्रियाओं का अंदाज़ा लगाया जा सके। एक जानकारी यह लीक होकर आई कि इस योजना के तहत बैतुल मुक़द्दस को हमेशा के लिए इस्राईल की राजधानी बना दिया जाएगा और अमरीका ने बाक़ायदा इसका एलान भी कर दिया और अमरीका दूतावास तेल अबीब से बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित कर दिया।

एक जानकारी यह लीक हुई कि पश्चिमी तट के इलाक़े को दो भागों में बांट दिया जाएगा एक भाग जार्डन के तहत संचालित होगा और दूसरा भाग फ़िलिस्तीनियों के पास रहेगा। यह जानकारी भी लीक की गई कि जो फ़िलिस्तीनी अलग अलग देशों में या फ़िलिस्तीन के भीतर शरणार्थी का जीवन व्यतीत कर रहे हैं उन्हें अपने घर वापस लौटने के अधिकार से हमेशा के लिए वंचित कर दिया जाएगा क्योंकि उनके इलाक़ों पर ज़ायोनी शासन ने ग़ैर क़ानूनी रूप से बस्तियों का निर्माण करके यहूदियों को बसा दिया है।

जानकारियां लीक होती रहीं और यह भी कहा जाता रहा कि कुछ ही दिनों या कुछ हफ़्तों में डील आफ़ सेंचुरी की घोषणा कर दी जाएगी।

फिर इसी बीच यह ख़बरें आने लगीं कि इस्राईल के प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने अमरीकी सरकार से मांग की है कि वह फिलहाल डील आफ़ सेंचुरी की घोषणा को टाल दे।

इस्राईली टीकाकार श्लोमो शामीर ने मआरीव अख़बार में अपने एक लेख में लिखा कि डीच आफ़ सेंचुरी योजना एलान से पहले ही विफल हो चुकी है। लेखक का कहना है कि इस्राईल में अमरीकी राजदूत डेविड फ़्रेडमैन ने यह कहा कि डील आफ़ सेंचुरी की घोषणा उस समय की जाएगी जब इसे लागू करने की संभावनाएं अपनी अंतिम सीमा पर पहुंच जाएंगी। फ्रेडमैन ने यह कहकर वास्तव में यह संकेत दे दिया है कि डील आफ़ सेंचुरी की घोषणा लंबे समय के लिए टाल दी गई है।

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने भी डील आफ़ सेंचुरी की घोषणा को अनिश्चित काल के लिए टाल दिय गया है।

डील आफ़ सेंचुरी को टालने का कारण यह है कि इस योजना में खुलकर फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों पर हमला किया गया और इस्राईल के अवैध हितों को तर्कहीन ढंग से समर्थन दिया गया है। इस योजना को तैयार करने वालों से यह ग़लत फ़हमी हुई कि वह यह नहीं समझ सके कि हालात बदल चुके हैं। अब वह हालात नहीं है जिनमें इस्राईल की स्थापना की घोषणा की गई थी। इस समय हालात एसे हैं कि इस्राईल कई तरफ़ से बुरी तरह घिर चुका है। एक तरफ हिज़्बुल्लाह  है जिसने वर्ष 2006 के युद्ध में इस्राईल को बुरी तरह पराजित किया और उसके बाद से हिज़्बुल्लाह की शक्ति में कई गुना की वृद्धि हो चुकी है। एक तरफ़ ग़ज़्जा में फ़िलिस्तीनी संगठन हैं जिन्होंने हालिया दिनों इस्राईल से अपने टकराव के दौरान अपनी मिसाइल शक्ति का इस तरह प्रदर्शन किया कि पूरे इस्राई पर ख़ौफ़ छा गया।

एक समस्या यह भी है कि डील आफ़ सेंचुरी को लागू करने के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को मुख्य स्तंभ के रूप में दृष्टिगत रखा गया था मगर वरिष्ठ सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की निर्मम हत्या और यमन युद्ध के कारण बिन सलमान पूरी दुनिया में बुरी तरह बदनाम हो गए हैं। अर्जेन्टीना में जी-20 के शिखर सम्मेलन के अवसर पर यह मुद्दा छा गया। फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैकक्रां ने बताया कि उन्होंने दो टूक शब्दों में बिन सलमान से कहा है कि पूरा यूरोप चाहता है कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या से जुड़े सारे तथ्य सामने आएं और इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय जांच कराई जाए जिस पर भरोसा किया जा सके।

दूसरी ओर अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की गुप्त रिपोर्ट में यह कहा गया है कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या में बिन सलमान के लिप्त होने के ठोस इशारे मौजूद हैं।

कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भी कहा कि जमाल खाशुक़जी की हत्या से जुड़ी सारी जानकारी सामने आनी चाहिए।

इन हालात को देखते हुए बिन सलमान के लिए अपना पद बचा पाना कठिन हो गया है इसीलिए अमरीका की ट्रम्प सरकार और इस्राईल की नेतनयाहू सरकार दोनों को यह अनुमान हो चुका है कि डील आफ़ सेंचुरी की अगर घोषणा कर भी दी जाए तो इसे लागू करा पाना असंभव होगा।