संयुक्त राष्ट्रसंघ ने वर्ष 2019 के लिए यमन को और अधिक मानवता प्रेमी सहायता भेजने का आह्वान किया है और साथ ही चेतावनी दी है कि युद्धग्रस्त यमन बड़ी मानव त्रासदी के मुहाने पर है। राष्ट्रसंघ के महासचिव एन्टोनियो गुटैरेस ने अभी कुछ दिन पहले यमन की स्थिति को विश्व का सबसे बदतरीन मानवीय संकट बताया और कहा था कि यमन मानव त्रासदी के मुहाने पर है।
यमन की दयनीय व मानवीय स्थिति के प्रति राष्ट्रसंघ के अधिकारियों की चिंता इस बात की सूचक है कि यमन की बहुत विषम व विस्फोटक स्थिति है और विश्व समुदाय को उसे गम्भीरता से लेना चाहिये। यमन में जारी संकट को समाप्त करने की विश्व समुदाय की ज़िम्मेदारी है।
सऊदी अरब की अगुवाई में बना गठबंधन लगभग चार वर्षों से यमन पर बमबारी कर रहा है जिसमें अब तक 14 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं। मारे जाने वालों में अधिकांश बच्चे और महिलाएं हैं।
इतने दिनों से सऊदी अरब की अगुवाई में बने गठबंधन को जब अपने लक्ष्य में सफलता नहीं मिली तो उसने आवासीय क्षेत्रों पर हमलों में और वृद्धि कर दी है।
बाज़ारों, मस्जिदों, वाहनों यहां तक कि स्कूली छात्रों को ले जाने वाली बसों पर सऊदी अरब के पाश्विक हमलों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
सऊदी अरब और उसकी अगुवाई में बना गठबंधन यमन में जो बमबारी कर रहा है और लोगों तक मानवीय सहायता तक नहीं पहुंचने दे रहा है उसकी एक बहुत बड़ी वजह, सऊदी अरब के प्रति अमेरिका और कुछ दूसरे देशों और जायोनी शासन का भरपूर समर्थन प्राप्त है।
दूसरे शब्दों में अमेरिका विभिन्न प्रकार के आधुनिकतम हथियारों से सऊदी अरब को लैस कर रहा है और वह उन हथियारों का प्रयोग यमनी जनता के जनसंहार के लिए कर रहा है। अमेरिका के एक रिपब्लिकन सिनेटर रेन्ड पाल ने कहा है कि यमन के दसियों हज़ार लोगों की हत्या का ज़िम्मेदार सऊदी अरब है और अमेरिका सऊदी अरब की मदद कर रहा है।
उन्होंने अमेरिका के साथ सऊदी अरब के संबंधों पर पुनरविचार करने की मांग की है। अभी हाल ही में अलजज़ीरा टीवी चैनल ने अपनी एक रिपोर्ट में घोषणा की थी कि यमन में विश्व की सबसे विषम मानव त्रासदी का ज़िम्मेदार अमेरिका है।
इसी प्रकार यमन में सक्रिय पांच सहायता संगठनों ने भी अमेरिका को संबोधित करते हुए एक संयुक्त विज्ञप्ति उसे भेजी है ताकि वह इस बात से अवगत हो जाये कि विश्व समुदाय यमन में उसके विरोधाभासी व्यवहार से भलीभांति अवगत है और उसे अपने कृत्यों पर नज़र डालनी चाहिये।
अमेरिका आम जनमत को धोखा देकर एक ओर स्वयं को अत्याचार से पीड़ित यमनी जनता की सहायता करने वाला सबसे बड़ा देश बताने की चेष्टा है और दूसरी ओर वह अरबों डालर का हथियार सऊदी अरब को देकर यमनी जनता का जनसंहार करने में उसकी सहायता खुलकर कर रहा है।
बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि यमनी जनता के खिलाफ हो रहे अपराधों और सऊदी अरब के पाश्विक हमलों का जारी रहना उसे प्राप्त विदेशी समर्थन का परिणाम है।