सऊदी अरब और मुहम्मद बिन सलमान पर कठोर प्रतिबंध लगाने की अमरीकी कांग्रेस के सदस्यों की कोशिशों के जवाब में ट्रम्प ने साफ़ साफ़ कहा कि मध्यपूर्व में हमारे उपस्थित रहने का एक ही कारण है इस्राईल की रक्षा करना। वाशिंग्टन पोस्ट को साक्षात्कार देते हुए ट्रम्प ने कहा कि तेल का अब इतना महत्व नहीं रहा कि हम उसकी वजह से मध्यपूर्व में मौजूद रहें क्योंकि अब हम अतिरिक्त तेल का उत्पादन कर रहे हैं हम इस इलाक़े में इस्राईल की वजह से मौजूद हैं। ट्रम्प ने आगे कहा कि सऊदी अरब हमारा महत्वपूर्ण घटक है, सऊदी अरब की मदद न हो तो इस्राईल को बहुत अधिक कठिनाइयों का सामना हो जाएगा, सऊदी हमारे लिए अरबों डालर की रक़म ख़र्च कर रहे हैं और वह ईरान पर अंकुश लगाते हैं।
ट्रम्प का यह बयान उन सारे रहस्यों से पर्दा उठाता है जो मध्यपूर्व के इलाक़े में घटने वाली घटनाओं के पीछे निहित हैं और यह भी पता चलता है कि इन घटनाओं में किस देश ने किस उद्देश्य से क्या रोल अदा किया। यह साफ़ हो जाता है कि इस्राईल के ख़िलाफ़ अरबों की लड़ाई में अमरीका से सहयोग करने वाले लोग कौन थे।
अब हम यह समझ सकते हैं कि इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध और उस पर क़ब्ज़ा करने में सऊदी अरब तथा फ़ार्स खाड़ी के अन्य देशों ने अमरीका की किस तरह मदद की। अब हम यह भी समझ सकते हैं कि पिछले सात साल से सीरिया पर युद्ध क्यों थोपा गया है, हम यह भी समझ सकते हैं कि लीबिया में कर्नल मुअम्मर क़ज़्ज़ाफ़ी के खिलाफ़ क्यों आंदोलन चलवाया गया और क्यों लेबनान से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधक संगठनों को बाहर निकाला गया? यमन पर चार साल से युद्ध क्यों थोपा गया है? ईरान पर प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं? अमरीका और इस्राईल के खिलाफ़ प्रतिरोध करने वाले संगठनों विशेष रूप से हिज़्बुल्लाह, हमास और जेहादे इस्लामी को आतंकी संगठनों की सूची में क्यों शामिल किया गया है?
ट्रम्प तथ्यों से बिना किसी हिचकिचाहट के पर्दा हटा रहे हैं और सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के मामले में कांग्रेस को कोई बड़ा क़दम उठाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए वह यहूदी लाबी से पेंग बढ़ा रहे हैं जो कांग्रेस पर वर्चस्व रखती है। क्या ट्रम्प अपनी इस कोशिश में सफल हो पाएंगे यह बात में पता चलेगा।
यह हक़ीक़त से पर्दे हटने बल्कि फटने का समय है, कम से कम इस मामले में ट्रम्प का शुक्रिया अदा करना चाहिए।
साभार रायुल यौम