इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई प्रतिनिधि ग़ुलाम अली ख़ुशरू ने इस मुलाक़ात में अमरीका के एकपक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकलने और ईरान के साथ सहयोग करने वाले सदस्य देशों को धमकियां दिए जाने का ब्योरा पेश करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के इतिहास में एेसा कभी भी नहीं हुआ कि एक स्थाई सदस्य, संयुक्त राष्ट्र संघ के बाक़ी सदस्यों को सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव की प्रतिबद्धता करने के कारण सज़ा दे।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव से मांग की है कि वह ईरान के विरुद्ध प्रतिबंध लगाए जाने और क़ानून पर अमल न करने पर अपने दृष्टिकोण की घोषणा करें।
इस मुलाक़ात में संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई प्रतिनिधि ने यमन पर सऊदी अरब के हमलों को भीषण मानवीय त्रासदी क़रार दिया और इस विध्वसंक युद्ध को समाप्त करने और यमनी पक्षों के बीच फिर से वार्ता आरंभ किए जाने की अपील की।
इस मुलाक़ात में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी वैश्विक चुनौतियों के मुक़ाबले में बहुपक्षीयवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए आशा व्यक्त की कि यमन युद्ध शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा और इस मानवीय त्रासदी पर जल्द ही रोकथाम लग जाएगी।