वहीद मज़लूमीन को बधुवार की सुबह फांसी दी गई। वहीद मज़लूमीन के साथ ही मुहम्मद इसमाईल क़ासेमी को भी फांसी दे दी गई है।
इन दोनों ने देश के आर्थिक, वित्तीय और फ़ारेन करेन्सी के पूरे सिस्टम को नुक़सान पहुंचाने के लिए अपना एक नेटवर्क तैयार कर लिया था जिसकी मदद से वह ग़ैर क़ानूनी रूप से बैंक ट्रांज़ैक्शन करते थे और सोने के सिक्के तथा विदेशी मुद्रा की स्मगलिंग करते थे।
इस नेटवर्क के लोग दूसरों के बैंक खातों का प्रयोग करके वित्तीय लेनदेन का काम अंजाम देते थे।
इन अपराधियों ने कई बूढ़े व्यक्तियों और सीधे साधे लोगों के बैंक खातों को भी अपने भ्रष्टाचार के लिए प्रयोग किया।