ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का दूसरा चरण 5 नवंबर से लागू हो गया है और इस पर अमेरिका को विश्व समुदाय के विरोध का सामना है। क्योंकि अमेरिका की एक पक्षीय नीतियां और समझौतों के प्रति वचनबद्ध न रहना राष्ट्रसंघ के घोषणा पत्र और बहुलतावाद के खिलाफ है।
वास्तव में संयुक्त राष्ट्रसंघ के इतिहास में यह पहली बार है जब सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य अमेरिका विश्व के दूसरे राष्ट्रों को भी मजबूर कर रहा है और उन दबाव डाल रहा है कि वे भी सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन करें और जो देश सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के उल्लंघन में उसकी हां में हां नहीं मिला रहे हैं उन्हें वह दंडित भी कर रहा है।
रोचक बात यह है कि अमेरिका एक ओर स्वयं को मानवाधिकारों की रक्षा का दावेदार कहता और समझता है और दूसरी ओर वह सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का खुल्लम खुल्लाह उल्लंघन कर रहा है।
दूसरे शब्दों में उसकी कथनी और करनी में स्पष्ट विरोधाभास को देखा जा सकता है। राष्ट्रसंघ में ईरानी राजदूत ग़ुलाम अली खुश्रो ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद में अपने भाषण में अमेरिका की एक पक्षीय नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका की मनमानी और एकपक्षीय कार्यवाहियों ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता की बुनियादों को ख़तरे में डाल दिया है।
सवाल यह उठता है कि क्या विश्व समुदाय अमेरिका की एक पक्षीय कार्यवाहियों से मुकाबले में अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह कर सका? इस संबंध में सबसे अधिक ध्यान यूरोप की ओर जाता है क्योंकि वह परमाणु समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
यूरोपीय संघ के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते की रक्षा के लिए और तेहरान के साथ व्यापारिक संबंधों की सुरक्षा की दिशा में प्रयासों को पिछले सप्ताह तेज़ कर दिया गया है।
यह बयान एसी स्थिति में सामने आ रहा है जब स्विफ्ट व्यवस्था ने घोषणा की है कि वह ईरान के कुछ बैंकों का स्विफ्ट संपर्क काट देगी।
यूरोपीय संघ का जो विशेष वित्तीय चैनल है उसने वादा किया है कि जो यूरोपीय कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करके ईरान के साथ व्यापार को जारी रखेंगी उनकी वह सहायता करेगा पर उसका यह दावा भी अभी अस्पष्ट है।
बहरहाल जो चीज़ निश्चित है वह यह है कि अमेरिका के एकपक्षीय रूप से परमाणु समझौते से निकल जाने से सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का खुला उल्लंघन हो रहा है और अमेरिका का यह रवइयां अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन व अनदेखी है।