तुर्की के इस्तांबूल शहर में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में इस देश के मुखर आलोचक पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या और रियाज़ की जेलों में नागरिक व मानवाधिकार के उल्लंघन के आलोचकों और आस्था की दृष्टि से विरोधी लोगों की गिरफ़्तारी के बाद, सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात को स्वीकार किया कि इस देश को अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की ओर से मानवाधिकार के संबंध में 258 बार चेतावनी मिली है। इस बात को मानवाधिकार परिषद में मौजूद सऊदी प्रतिनिधि बंदर अलऐबान ने स्वीकार किया है।
सऊदी अरब में विरोधियों का दमन बुरी तरह जारी है और ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद एक और पत्रकार की हत्या से इस बात की चिंता बढ़ गयी है कि सऊदी अरब में मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन अब रक्तपात का रूप लेता जा रहा है।
सऊदी अरब के आलोचक पत्रकार तुर्की बिन अब्दुल अज़ीज़ अलजासिर की कई दिन पहले सऊदी अरब की जेल में अत्यधिक यातना से मौत हो गयी।
सऊदी अरब में शासक सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ के हाथ में सत्ता की बागडोर आने और उनके बेटे मोहम्मद बिन सलमान के युवराज बनने के बाद, इस देश में विरोधियों के ख़िलाफ़ हिंसा की नई लेहर यह दर्शाती है मौजूदा सऊदी शासन किसी भी विरोधी स्वर को सहन करने के लिए तय्यार नहीं है बल्कि विरोधियों को बर्बरतापूर्ण तरीक़े से जान से मार रहा है।
आले सऊद शासन को मानवाधिकार के उल्लंघन के संबंध में व्यापक स्तर पर चेतावनियों का सामना, यह दर्शाता है कि यह अत्याचार व आतंकवाद का समर्थक शासन मानवाधिकार व अंतर्राष्ट्रीय अधिकार के लिए बहुत गंभीर चुनौती बन गया है।
ऐसे माहौल में सऊदी अरब को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में दूसरी बार सदस्यता मिलने से पता चलता है कि इस परिषद में सदस्यता का मानदंड क़ानूनी नहीं बल्कि इसके पीछे राजनैतिक साठगांठ और पैसों का खेल है।