15 अक्टूबर 2018 - 16:25
इस्राईल में स्कूली बच्चों को पढ़ाया जाता है सैयद हसन नसरुल्लाह का पाठ! अपने नेताओं से ज़्यादा सैयद हसन नसरुल्लाह की बातों को सत्

लेबनान का हिज़्बुल्लाह आंदोलन इस्राईल का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है और छोटे से देश लेबनान के इस प्रतिरोधक आंदोलन इस्राईल पर एसी धाक बिठा दी है कि इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी, सेना तथा रणनैतिक संस्थाओं का काफ़ी समय हिज़्बुल्लाह आंदोलन तथा उसके प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह के बारे में विचार करने और उनके ख़िलाफ़ साज़िशें तैयार करने में ख़र्च हो जाता है।

हिज़्बुल्लाह और उसके प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह का भय पूरे इस्राईल पर इस तरह छाया हुआ है कि इस्राईल के स्कूलों में बच्चों को सैयद हसन नसरुल्लाह के व्यक्ति के बारे में पढ़ाया जाता है। इस्राईली बच्चों को पढ़ाया जाता है कि सैयद हसन नसरुल्लाह असाधारण कैरिज़्मेटिक व्यक्तित्व के मालिक हैं वह हमेशा इस बात का ध्यान रखते हैं कि इस्राईल में जो कुछ हो रहा है उसकी उन्हें पूरी जानकारी रहे और यही कारण है कि वह इस्राईली समाज को भलीभांति पहचानते हैं। इस्राईल का पूरा मानचित्र और उसका पूरा ब्योरा हमेशा उनकी नज़र के सामने रहता है और यही कारण है कि वह कोई भी मनोवैज्ञानिक संदेश बहुत सरलता से इस्राईली समाज में फैला देते हैं और इस संदेशों का इस्राईल में रहने वालों की मानसिकता पर गहरा असर होता है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने वर्ष 2000 में दक्षिणी लेबनान से इस्राईली सैनिकों के बाहर निकलने के बाद बिन्ते जुबैल शहर में जो भाषण दिया था उसमें उन्होंने कहा था कि इस्राईली समाज मकड़ी के जाले से ज़्यादा कमज़ोर है जिसे बड़ी सरलता से ध्वस्त किया जा सकता है। यह बातें इस्राईली स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई जाने वाली किताबों में लिखी गई हैं। यह किताब यूनी ग़राफ़ नाम के लेखक ने लिखी है और इसे संबंधित मंत्रालय की मंज़ूरी मिली है।

इस्राईली अख़बार यदऊत अहारोनोत में सामरिक मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स फ़िशमैन ने अपने एक लेख में लिखा कि इस्राईल की यह आदत रही है कि वह अरब नेताओं को कभी भी गंभीरता से नहीं लेता लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी हैं। जब सैयद हसन नसरुल्लाह कोई धमकी दे देते हैं तो हमारे लिए उचित है कि उसे पूरी गंभीरता से लें क्योंकि यह वह व्यक्ति है कि जब कोई धमकी दे देता है तो उसे पूरा ज़रूर करता है।

इस्राईल के चैनल-10 में अरब मामलों के विशेषज्ञ सेफ़ी यहज़ कईली ने कहा कि यदि सैयद नसरुल्लाह कहते हैं कि हिज़्बुल्लाह के पास इस्राईल को रोक देने की ताक़त है तो मुझे उनकी बात पर यक़ीन है। हमें उनकी इस धमकी को भी पूरी गंभीरता से लेना चाहिए कि वह गोलान हाइट्स वाला मोर्चा खोल सकते हैं क्योंकि यदि हिज्ब़ुल्लाह के लड़ाके इस्राईल की सीमा पर पहुंच गए तो वह सबसे माहिर योद्धा साबित होंगे।

इस्राईली सेना के पूर्व कमांडर जनरल गैबी सूर ने कहा कि सैयद हसन नसरुल्लाह हिज़्बुल्लाह को दुनिया का सबसे शक्तिशाली संगठन बना देने में कामयाब हो गए। सैयद हसन नसरुल्लाह वह व्यक्ति हैं जिन पर फ़िलिस्तीनियों और अरब जगत की निगाहें लगी रहती हैं। उनकी वही स्थिति हो गई है जो अपने समय में जमाल अब्दुन्नासिर की होती थी। हालांकि वह इस्राईल के सामने छह दिन टिक पाए थे जबकि सैयद हसन नसरुल्लाह ने टिकने के साथ ही चार हफ़्ते से अधिक समय के लिए एक चौथाई इस्राईली आबादी को भूमिगत पनाहगाहों में छिपने पर मजबूर कर दिया था।

उत्तरी इस्राईल में एक सर्वे में यह नतीजा निकला कि 80 प्रतिशत इस्राईलियों को सैयद हसन नसरुल्लाह की हर बात पर सौ प्रतिशत विश्वास है।

हाआरेत्ज़ ने अपने एक लेख में लिखा कि सैयद हसन नसरुल्लाह केवल युद्धों के कारण नहीं बल्कि अपनी हर धमकी को पूरा करने के कारण इस्राईली समाज की सोच में बहुत गहराई तक घुसे हुए हैं।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस्राईल को दक्षिणी लेबनान से मार भगाया और इस्राईल पर एसा अंकुश लगाया है जिसकी कोई और मिसाल नहीं है। यह पहला अवसर है कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने एक अरब नेता के रूप में अपनी धाक बिठाई है। वह कभी भी निराधार बात नहीं करते, कभी झूठ नहीं बोलते, एक एक शब्द नपा तुला बोलते हैं। अब यह स्थिति हो गई है कि इस्राईली समाज के बारे में कहा जाता है कि वह अपने नेताओं पर विश्वास नहीं करता लेकिन सैयद हसन नसरुल्लाह के बयानों को बिलकुल सही मानता है।