इराक़ में संसदीय चुनाव मई 2018 में आयोजित हुए और इराक का नया संसद अब तक दो बार बैठक का आयोजन कर चुका है किंतु अभी तक केवल संसद सभापति का ही चयन हो पाया है और राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चयन अभी बाकी है।
इराक़ में चूंकि प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का गठन करता है इस लिए सत्ता शक्ति उसी के हाथ में रहती है और यह पद, इराक का सर्वोच्य राजनीतिक पद है लेकिन नये प्रधानमंत्री के चयन की राह में कई रुकावटें हैं जिनमें सब से बड़ी रुकावट, अमरीका है। अमरीका का यह प्रयास है कि इराक में एक कमज़ोर मंत्रिमंडल का गठन हो जो अमरीकी हितों का ध्यान रखे, मध्य पूर्व में इस्राईल के साथ सांठगांठ की तथाकथित शांति योजना का समर्थन करे और ईरान से इराक़ के संबंध कमज़ोर करे। उदाहरण स्वरूप अमरीका के रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रोबियो ने अपने हस्तक्षेप पूर्ण बयान में खुल कर कहा है कि वाशिंग्टन को चाहिए को वह इराक़ में किसी एेसे को पेट्रोलियम मंत्री न बनने दे जिसका ईरान से निकट संबंध हो। इसी प्रकार अमरीकी यह भी कह रहे हैं कि अगर इराक़ में प्रधानमंत्री कोई एेसा व्यक्ति बना जो ईरान से निकट होगा तो अमरीका इराक़ को दी जाने वाली हर प्रकार की मदद रोक देगा।
वास्तव में इराक़, अमरीका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, अमरीका सन 2003 में इस देश पर हमले के बाद से यह प्रयास कर रहा है कि उसे अपनी योजनाओं के मॅाडल के रूप में मध्य पूर्व में पेश करे लेकिन इराक़ ने स्वाधीनता का रास्ता चुना जो अमरीका के लिए समस्या बन गया और यही वजह है कि अमरीका , इराक़ में सरकार गठन के मार्ग में समस्याएं उत्पन्न कर रहा है चिंताजनक बात यह है कि अगर अमरीका इस चरण में सफल नहीं भी हुआ तो भी वह इराक़ में सरकार गठन के बाद हालात खराब करने की कोशिश करेगा जैसा कि वह अतीत में कर चुका है।