विशेषज्ञों का कहना है कि रूस ने हमेशा से ही ईरान और तुर्की समेत मध्यपूर्व की समस्त क्षेत्रीय शक्तियों के साथ अच्छे रिश्ते रखने की कोशिश की है।
इस्राईली न्यूज़पेपर हारेट्ज़ में जिडीयोन लेवी ने लिखा है कि इस्राईल ने सीरिया में रूसी सैन्य विमान को गिराए जाने का सिनैरियो तैयार करके बहुत ही जोखिल भरा क़दम उठाया है, जिसे रूसी रक्षा मंत्रालय ने सभ्य रिश्तों की रेखा पार करना बताया है।
17 सितम्बर को सीरिया में बमबारी के बाद रूस के सैन्य विमान को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की घटना पर रूस के कड़ी धमकी के तुरंत बाद ही इस्राईली अधिकारियों को अपनी मूर्खतापूर्ण ग़लती का अहसास हो गया था।
रूस की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद, इस्राईली प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने ग़लती स्वीकार करते हुए कहा था कि वह इस घटना की जांच पूरी होने के बाद, अपने युद्ध मंत्री को स्पष्टीकरण के लिए मास्को भेजने के लिए तैयार हैं।
वास्तव में सीरिया में जारी युद्ध का अंत जिस तरह से हो रहा है और इलाक़े में ईरान और प्रतिरोधी आंदोलनों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, वह इस्राईली अधिकारियों ने सपने में भी नहीं सोचा था। यह डर उन्हें इतना सता रहा है कि वह कुछ ऐसी ग़लतियां करते जा रहे हैं जो इस्राईल के लिए ख़ुदकुशी के समान हो सकती हैं।
लेवी के अनुसार, इस्राईल को यह समझना होगा कि उसे कुछ रेखाओं को कभी पार नहीं करना है, क्योंकि अगर वह ऐसी ग़लती करता है तो उसे इसकी भारी क़ीमत चुकाना पड़ सकती है।
इसके अलावा, हाल ही में हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैय्यद हसन नसरुल्लाह ने भी इस्राईल को चेतावनी दी है कि सीरिया में आसानी से हवाई हमलों के दिन बीत चुके हैं।
सीरिया युद्ध में सीरियाई सेना और हिज़्बुल्लाह की सफलता ने हिज़्बुल्लाह को 2006 की तुलना में कि जब दोनों के बीच 33 दिवसीय सीधा युद्ध हुआ था, कहीं अधिक शक्तिशाली और अनुभवी बना दिया है और उसके लड़ाके अवैध अधिकृत इलाक़ों से मिलने वाली सीमाओं पर मौजूद हैं।
इन समस्त परिस्थितियों के मद्देनज़र, रूस की चेतावनी व्यवहारिक लगती है, जिसे निश्चित रूप से इस्राईली अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है।