हिज़्बुल्लाह के उपमहासचिव शैख़ नई क़ासिम ने कहा कि अमरीका जिसकी आतंकवाद समर्थक नीतियां सीरिया में नाकाम हो गयी हैं, इस हालत में नहीं है कि वह ईरानी सलाहकारों और घटक लेबनानी प्रतिरोधक बल के सीरिया से निकलने की मांग करे जो इस अरब देश में आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग में विजेता रहे हैं।
पिछले हफ़्ते लेबनान के दैनिक अलअख़्बार की रिपोर्ट के अनुसार, अमरीका के एक प्रतिनिधिमंडल ने जून में दमिश्क़ का दौरा किया और सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार अलअसद के विशेष सुरक्षा सलाहकार अली ममलूक से मुलाक़ात की थी। अमरीकी प्रतिनिधिमंडल सुरक्षा व गुप्तचर अधिकारियों पर आधारित था।
इस प्रतिनिधिमंडल ने 4 घंटे की बैठक के दौरान सीरिया से अमरीकी फ़ोर्सेज़ के निकलने के लिए तीन शर्तें रखीं थी। एक इस्राईल द्वारा अतिग्रहित गोलान हाइट्स के निकट दक्षिणी सीरिया से ईरानी सलाहकारों का निकलना, दूसरे आतंकवादी गुटों से संबंधित डेटा हवाले करना और तीसरे पूर्वी सीरिया में तेल के व्यापार में अमरीका को भागीदारी देना।
सोमवार को हिज़्बुल्लाह के उपमहासचिव शैख़ नईम क़ासिम ने अमरीका की ओर से इन शर्तों को अर्थहीन बताते हुए बल दिया कि विजेता शर्त तय करते हैं न कि अमरीका जिसे सीरिया में हार हुयी है।