डाॅक्टर अली लारीजानी ने शनिवार को कहा कि यूरोप की क्षमता और उसके निर्णय की शैली पर शक के बावजूद ईरान ने यह बात मान ली है कि वह परमाणु मामले के बारे में वार्ता के लिए एक समय निर्धारित करे ताकि इस समस्या के समाधान के लिए उसकी क्षमता और राजनैतिक इच्छा शक्ति को आज़माया जा सके। उन्होंने कहा कि ईरान को इस बात का अधिकार था कि जेसीपीओए से अमरीका के निकल जाने के बाद वह इस समझौते से निकल जाता और पहले की तरह अपनी परमाणु गतिविधियां आरंभ कर देता लेकिन कई यूरोपीय राष्ट्राध्यक्षों ने ईरानी अधिकारियों से संपर्क किया और कहा कि आप समझौते से न निकलिए और यूरोप एेसीे स्थितियां उत्पन्न कर देगा कि तेहरान को कोई नुक़सान न हो।
ईरान के संसद सभापति ने इसी तरह परमाणु गतिविधियों के संबंध में पश्चिमी देशों की ओर से ईरान से विशेष्टताएं लेने की कोशिश की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने परमाणु समझौते के अंतर्रगत अपने दायित्वों को पूरी ज़िम्मेदारी से पूरा किया है। ज्ञात रहे कि ईरान व यूरोप ने जेसीपीओए से अमरीका के निकलने के बाद इस समझौते को बाक़ी रखने के लिए वार्ता आरंभ की है। यूरोप ने कहा है कि वह एक एेसा पैकेज पेश करेगा कि अमरीकी प्रतिबंधों से ईरान को नुक़सान न हो।