हिज़्बुल्लाह के सांसद नोवाफ ने मंगलवार को लेबनान के अलमयादीन टीवी चैनल के साथ एक वार्ता में कहा कि बिन सलमान ने बश्शार असद को प्रस्ताव दिया था कि अगर वह ईरान और हिज़्बुल्लाह से संबंध तोड़ लें तो सीरिया के पुनर्निमाण में सऊदी अरब निवेश करेगा।
बिन सलमान ने बश्शार असद को अपने दूत द्वारा यह भी संदेश दिया था कि यदि वह ईरान और हिज़्बुल्लाह से दूरी बना लें तो सऊदी अरब उन्हें पूरी उम्र सीरिया का राष्ट्रपति बनाए रखने का समर्थन करेगा।
याद रहे सऊदी अरब कई साल पहले भी बश्शार असद को इसी प्रकार का प्रस्ताव दे चुका है।
सीरिया में संकट के आरंभ के बाद सन 2012 में इस देश के तत्कालीन शासक, किंग अब्दुल्लाह ने गुप्त रूप से एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर बश्शार असद से कहा था कि वह ईरान से संबंध तोड़ लें तो उसके बदले में उनकी सत्ता बची रहेगी और सऊदी अरब इस बात की गारंटी लेता है कि सीरिया का संकट समाप्त हो जाएगा।
बश्शार असद ने उस समय भी सऊदी प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था।
हालिया दिनों में सऊदी अरब ने यह प्रस्ताव एसी दशा में दिया है कि जब इस्राईल और अमरीका, ईरान की सीरिया में उपस्थिति का कड़ा विरोध कर रहे हैं और सीरिया से ईरान के निकलने की मांग कर रहे हैं।
ईरान, सीरिया की सरकार की मांग पर आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में सहयोग के लिए सीरिया में उपस्थित और ईरान ने कहा है कि जब तक सीरियाई सरकार चाहेगा ईरान आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में उसके साथ सहयोग जारी रखेगा।
सीरिया ने ईरान , रूस और उनके घटकों की मदद से देश से दाइश के आतंकवादियों को खदेड़ने में सफलता प्राप्त की है।