विदेशी समाचार एजेन्सी एपी के अनुसार इस संबंध में ग्लोबल टाइम्स एडिटर वेल ने कहा कि यूग़ोर अल्पसंख्यकों को हिरासती कैंप में क़ैद रखना ख़ौफ़नाक है।
ज्ञात रहे कि संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार संस्था ने यूग़ोर के साथ किए जाने वाले अधिकारियों के रवैये पर चिंता व्यक्त की थी।
इस हवाले से बताया गया है कि कट्टर अलगावादी मुसलमानों के हमले के परिणाम में यूग़ोर और कज़क मुसलमान अल्पसंख्यक सिनकियांग जाने पर विवश हुए जिन्हें जबरी रूप से क़ैद कर लिया गया।
समाचारपत्र की ओर से सीधे हिरासती कैंप का उल्लेख नहीं किया गया। इस हवाले से समाचार पत्र का कहना है कि यह प्रक्रिया पश्चिमी जगत के राय निर्धारण के विरुद्ध है जबकि शांति और स्थिरता हर हाल में सर्वोपरि होनी चाहिए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिनकियांग को ग़ुलमों की बस्ती में बदल दिया गया। ज्ञात रहे कि सिनकियांग की आबादी लगभग एक करोड़ है जिनमें अधिकतर मुसलमान अल्पसंख्यक यूग़ोर से संबंध रखते हैं।
इस क्षेत्र में यूग़ोर मुसलमान और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें होती रहती हैं और चीन अपने पश्चिमी प्रांत सिनकियां में तनाव का ज़िम्मेदार अलगवादी संगठनों को ठहराता है।