अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : रूस अलयौम की रिपोर्ट के अनुसार मानव अधिकारों के हाई कमिश्नर रअदुल हसन ने कहा है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का नरसंहार एक सोची समझी साज़िश से हो रहा है।
और मुमकिन है कि उन्हें इस से भी अधिक ख़तरनाक हालात का सामना करना पड़े।
इसलिए कि म्यांमार सरकार इन मुसलमानों को अपने देश का नागरिक मानती ही नहीं है, और कहती है कि यह लोग बंगाली है जो यहां ग़ैर क़ानूनी तौर पर रह रहे हैं।
साथ ही म्यांमार सरकार उन पर आतंकवाद का लेबल लगाकर उन्हें कुचल रही है।
Docters without Borders नामक संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से यहां के मुसलमानों के ख़िलाफ़ शुरू होने वाले सरकारी आतंकवाद के पहले ही महीने में 6700 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया, जबकि सरकार सिर्फ 400 लोग ही बता रही है।
19 दिसंबर 2017 - 04:32
समाचार कोड: 873155
Docters without Borders नामक संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से यहां के मुसलमानों के ख़िलाफ़ शुरू होने वाले सरकारी आतंकवाद के पहले ही महीने में 6700 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया, जबकि सरकार सिर्फ 400 लोग ही बता रही है।