अमेरिका जिन कारणों से ईरान पर प्रतिबंध लगाता है उसका एक कारण ईरान को प्रगति से रोकना है।
ईरान ने सेटेलाइट को अंतरिक्ष में लांच करने वाले राकेट सीमुर्ग़ का जो सफल परीक्षण किया है उसकी प्रतिक्रिया में अमेरिकी वित्तमंत्रालय ने 6 ईरानी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है।
अमेरिकी वित्तमंत्रालय की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति में आया है कि इन संस्थाओं की समस्त सम्पत्तियों को अमेरिका में ज़ब्त कर लिया जायेगा।
अमेरिका का यह नया प्रतिबंध ऐसी स्थिति में लगाया जा रहा है जब अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले सप्ताह तेहरान के विरुद्ध प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित किया था और अब उसे क़ानून का रूप धारण करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्ताक्षर की प्रतीक्षा है।
प्रस्ताव में आर्थिक प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है जबकि ईरान के विरुद्ध पारित होने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों का मुख्य लक्ष्य तेहरान को प्रगति करने से रोकना है।
प्रतीत यह हो रहा है कि अमेरिका ने जो ईरान विरोधी जो प्रस्ताव पारित किये हैं उससे वह तीन मुख्य लक्ष्यों को साधना चाहता है।
पहला लक्ष्य यह है कि अमेरिका ईरान के भीतर आर्थिक संकट व असमंजस का वातावरण पैदा करना चाहता है और वह ईरान विरोधी प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक बढ़ाचढ़ा कर पेश करना चाहता है।
ईरान विरोधी प्रतिबंधों का दूसरा लक्ष्य, अमेरिका इस्लामी क्रांति के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान जैसे संगठनों के क्रिया- कलापों व भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लगाना चाहता है।
ईरान विरोधी प्रतिबंधों का तीसरा लक्ष्य, ग़ैर परमाणु विषयों के संबंध में संभावित वार्ता के लिए भूमि प्रशस्त करना है।
कुछ समाचारिक हल्के ईरान विरोधी प्रस्तावों को प्रतिबंधों की काल कोठरी का नाम दे रहे हैं जबकि कहना चाहिये कि अमेरिका स्वयं इन कार्यवाहियों के साथ काल कोठरी में दफ्न हो जायेगा।
ईरानी राष्ट्र के मुकाबले में अमेरिका को निरंतर जिन विफलताओं का सामना करना पड़ रहा है उसे उनसे पाठ लेना चाहिये और साथ ही उसे इस बात को जान लेना चाहिये कि ईरानी राष्ट्र कभी भी षडयंत्रों से प्रभावित नहीं होगा और वह अपने मार्ग को जारी रखेगा।
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29 जुलाई 2017 - 18:01
समाचार कोड: 844914
अमेरिका जिन कारणों से ईरान पर प्रतिबंध लगाता है उसका एक कारण ईरान को प्रगति से रोकना है।