ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदी अमरीका के भरोसे के लायक़ न होने का चिन्ह
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने शनिवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की पाबंदियों की अवधि का बढ़ना यह दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नज़र में अमरीका भरोसे के लायक़ नहीं है।
अमरीकी सिनेट में गुरुवार को ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदी क़ानून आईएसए की अवधि 10 साल बढ़ाने का विधेयक पारित हुआ। इससे पहले अमरीकी प्रतिनिधि सभा ने भी इस विधेयक को पारित किया था।
ईरान और गुट पांच धन एक के बीच हुए परमाणु समझौते जेसीपीओए में जैसा कि इस संबंध में वरिष्ठ नेता ने बारंबार बल दिया है कि इस समझौते में कुछ अस्पष्ट बिन्दु हैं और इसमें ढांचागत कमज़ोरी है और अगर इस पर हर क्षण पैनी नज़र न रखी गयी तो इससे ईरान के वर्तमान और भविष्य को बहुत बड़ा नुक़सान पहुंच सकता है।
जिस समय 14 जुलाई 2015 को जेसीपीओए पर दस्तख़त हुए थे उस समय वरिष्ठ नेता ने राष्ट्रपति रूहानी के ख़त के जवाब में, गुट पांच धन एक के कुछ सदस्य के अविशवस्नीय होने का उल्लेख करते हुए बल दिया था कि जो अवतरण तय्यार हुआ उसकी बारीकी से समीक्षा होनी और उसे क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रना चाहिए और पारित होने की स्थिति में सामने वाले पक्ष की ओर से संभावित वादाख़िलाफ़ी का मार्ग बंद करना चाहिए।
अब कॉन्ग्रेस में अमरीका के इस क़दम ने एक बार फिर यह दर्शा दिया कि वे अवसर की तलाश में हैं ताकि ईरान पर दबाव डालने की नीति जारी रखें, कभी मानवाधिकार के उल्लंघन के दावे, कभी ईरान की मीज़ाईल क्षमता तो कभी ईरान पर आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप की आड़ में।
जेसीपीओए का उल्लंघन ऐसा विषय नहीं है जिसे इस्लामी गणतंत्र नज़र अंदाज़ करेगा। इन गतिविधियों पर ईरानी संसद और व्यवस्था पैनी नज़र रखे हुए है और इस बारे में फ़ैसला किया जाएगा।
अमरीकी क्रियाकलाप दर्शाते हैं कि जेसीपीओए के बावजूद ईरान के ख़िलाफ़ दुश्मनी व धमकी जारी है। इस प्रक्रिया का जारी रहना ही ईरान सहित विश्व समुदाय के निकट अमरीका के अविश्वस्नीय होने के लिए काफ़ी है।
3 दिसंबर 2016 - 18:05
समाचार कोड: 795814
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने शनिवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की पाबंदियों की अवधि का बढ़ना यह दर्शाता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नज़र में अमरीका भरोसे के लायक़ नहीं है।