18 अप्रैल 2015 - 12:41
ईरान के साथ बातचीत में शामिल वाशिंग्टन और उसके घटक तुरंत प्रतिबंध उठाने के लिए तय्यार

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एलान किया है कि ईरान के साथ बातचीत में शामिल वाशिंग्टन और उसके घटक तुरंत प्रतिबंध उठाने के लिए तय्यार हैं।

अबनाः अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एलान किया है कि ईरान के साथ बातचीत में शामिल वाशिंग्टन और उसके घटक तुरंत प्रतिबंध उठाने के लिए तय्यार हैं।
ओबामा ने शुक्रवार को कहा कि प्रतबंधों को हटाने के लिए विदेश मंत्री और दूसरों को रचनात्मक बातचीत करनी होगी। ओबामा ने वाशिंग्टन के दौरे पर गए इतालवी प्रधान मंत्री मैटियो रेन्ज़ी के साथ प्रेस कान्फ़्रेंस के दौरान कहा कहा, “प्रतिबंधों को कैसे कम करना है और उल्लंघन की हालत में पाबंदियों को दुबारा कैसे लगाना है। ऐसा करने के लिए अलग अलग तंत्र और मार्ग हैं।”
अमरीकी राष्ट्रपति ने इस देश की सिनेट की विदेशी संबंध समिति की ओर से ईरान के संबंध में लाए गए विधेयक को मान लिया है जिसमें अमरीकी कांग्रेस को ईरान के साथ अंतिम परमाणु समझौते की समीक्षा की इजाज़त दी गयी है।
ओबामा ने इससे पहले इस बिल को वीटो करने की धमकी देने के बावजूद इस पर दस्तख़त करने की अपनी इच्छा की व्याख्या में कहा, “ इस विधेयक की ज़बान से कम से कम मैं यह अर्थ निकाल सकता हूं कि यह विधेयक भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए यह संदेश नहीं दे रहा है कि जब भी वे कोई राजनैतिक समझौता करेंगे तो उन्हें कांग्रेस की इजाज़त लेनी पड़ेगी।”
अमरीकी सिनेट की विदेशी मामलों की समिति की ओर से पेश किए गए विधेयक के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा को अंतिम परमाणु समझौते की कॉपी कांग्रेस को समीक्षा के लिए भेजनी होगी और समीक्षा की मुद्दत के दौरान वे कांग्रेस की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध को नहीं हटाएंगे।
इन नए विधेयक में मुख्य रूप से यह बदलाव किया गया है कि इस समीक्षा की मुद्दत 60 दिन से घटा कर 52 कर दी गयी है।
आरंभिक समीक्षा की अवधि 30 दिन है और इसमें 12 दिन और जोड़ दिए जाएंगे अगर कांग्रेस ने इस समझौते को 60 वोटों वाले विधेयक के साथ अस्वीकृत करके ओबामा के पास भेज दिया। अगर अमरीकी राष्ट्रपति ने इस विधेयक को वीटो कर दिया तो कांग्रेस को इस वीटो को निरस्त करने के  लिए अतिरिक्त दस दिन का वक़्त दिया जाएगा।
ज्ञात रहे बुधवार को अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि ओबामा प्रशासन अमरीकी कांग्रेस की ओर से पेश किए गए नए विधेयक के बावजूद ईरान के साथ अंतिम परमाणु समझौता करने में सफल होगा।