अहलेबैत अ. समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के एक जवान “लोकास ब्रोंक” ने शिया धर्म स्वीकार करने के बाद नजफ़े अशरफ़ में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के हरम की ज़ियारत की।
यह अमेरिकी जवान जिसका संबंध कैलिफोर्निया से है ,पहले ईसाई धर्म का मानने वाला था उसने एक पाकिस्तानी जवान से दोस्ती के परिणाम स्वरूप शिया धर्म की जानकारी हासिल की और इस्लाम और शिया मज़हब का अध्ययन करने के बाद शिया धर्म स्वीकार कर लिया।
शिया धर्म स्वीकार करने के बाद यह जवान अहलेबैत अ. और ख़ास कर अमीरुल मोमिनीन का आशिक़ हो गया और आपकी ज़ियारत के लिए नजफ़े अशरफ़ पहुंचा।
लोकास ब्रोंक का अमीरुल मोमिनीन के हरम के अधिकारियों ने स्वागत किया और उन्हें बड़े ही सम्मान के साथ हरम की ज़ियारत कराई।
इस ताजा शिया हुए जवान ने हरम की ज़ियारत के बाद अपनी भावनाओं को बयान किया और कहा कि मैं इतनी खुशी महसूस कर रहा हूं कि बयान नहीं कर सकता।
लोकास ने कहाः मैं मानवता और अदालत के अमीर के सामने खड़ा हूँ और उनकी सेवा में अपनी निष्ठा का ऐलान कर रहा हूँ।
उन्होंने कहा: जब मैं हरम में दाखिल हुआ तो मेरा दिल कांप रहा था मेरे पैर हिल रहे थे और मैं चल नहीं पा रहा था। लेकिन जब मैंने ज़ियारत पढ़ी तो शांति का एहसास हुआ। मैं ज़ाएरीन को देख रहा था कि वह मेरे अग़ल बग़ल पूरे इत्मीनान के साथ इबादत और दुआ में व्यस्त हैं ऐसा एहसास मैंने जीवन में कभी नहीं पाया।







