2 अप्रैल 2015 - 17:45
यमन हमले को लेकर ऑले सऊद में बढ़ते मतभेद।

सऊदी प्रिंस वलीद बिन तलाल ने अमेरिका के जाल में फंसने के बारे में, कि जो उनके अनुसार सऊदी अरब को कमजोर करने और उसे बांटने की कोशिश कर रहा है, चेतावनी दी और सऊदी अरब के उच्च अधिकारियों से मांग की कि वह मोहम्मद बिन सलमान और मोहम्मद बिन नाएफ जैसे कम उम्र सऊदी शहज़ादों के खिलाफ उठ खड़े हों और उन्हें सऊदी अरब के भविष्य से खेलने की अनुमति न दें।

अबनाः सऊदी प्रिंस वलीद बिन तलाल ने अमेरिका के जाल में फंसने के बारे में, कि जो उनके अनुसार सऊदी अरब को कमजोर करने और उसे बांटने की कोशिश कर रहा है, चेतावनी दी और सऊदी अरब के उच्च अधिकारियों से मांग की कि वह मोहम्मद बिन सलमान और मोहम्मद बिन नाएफ जैसे कम उम्र सऊदी शहज़ादों के खिलाफ उठ खड़े हों और उन्हें सऊदी अरब के भविष्य से खेलने की अनुमति न दें।
सऊदी अरब के युवराज मक़रन बिन अब्दुल अजीज ने यमन में सऊदी अरब के सैन्य हमले का विरोध किया है और वह भी पूर्व शाह के बेटे और नेशनल गार्ड के मंत्री मपब बिन अब्दुल्ला जैसे विरोधियों के शिविर में शामिल हो गए हैं मकरन बिन अब्दुल्ला ने रियाद में नेशनल गार्ड मंत्रालय के भवन में सैन्य कमांडरों से मुलाकात में कहा कि हर सऊदी नागरिक अपने देश की रक्षा की प्रंटलाइन पर है। राजकुमार मक़रन ने सावधानी बरते जाने की जरूरत पर जोर दिया और विद्रोह के आरोप से बचने के लिए इस बारे में अधिक जानकारी देने से परहेज किया।
एक और सऊदी राजकुमार खालिद बिन तलाल भी, यमन में सउदी अरब की आक्रामकता के विरोधियों में शामिल हो गये हैं। इस राजकुमार ने ट्विटर पर लिखा है कि शर्मुश शेख बैठक में अरब लीग के फैसले का इंतजार किए बिना यमन पर हमले का सऊदी राजा सलमान बिन अब्दुल अजीज का फैसला इस संगठन के अपमान के समान है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस आक्रामकता से सऊदी अरब को नुकसान पहुंचेगा। सऊदी अरब के विभिन्न शहरों में आंतरिक विरोध में बढ़ोत्तरी आने के अलावा यमन में सउदी हमले जारी रहने की स्थिति में उसे हार का मुंह देखना पड़ेगा क्योंकि सऊदी अरब के किराये की सेना, अमेरिका से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बावजूद आधुनिक हथियारों का उपयोग करना नहीं जानती है। इन सैन्य विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि यमन में आले सऊद की आक्रामकता क्षेत्र में झड़पों को हवा देगी और आतंकवाद के कदम और मज़बूत होंगे।
सैन्य विशेषज्ञों ने इसी तरह कहा है कि सऊदी अरब की सेना का हाल भी, 1965 में मिस्र की सेना जैसा होगा कि उस समय मिस्र के साठ हजार से अधिक लोग मारे और घायल हुए थे।