10 फ़रवरी 2015 - 08:14
ओबामा ने दिया घिसा-पिटा बयान।

अमरीका के राष्ट्रपति ने आईएसआईएल सहित अनेक आतंकी गुटों को अस्तित्व प्रदान करने में अपने देश की भूमिका पर ध्यान दिए बिना ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाया है।

अमरीका के राष्ट्रपति ने आईएसआईएल सहित अनेक आतंकी गुटों को अस्तित्व प्रदान करने में अपने देश की भूमिका पर ध्यान दिए बिना ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप लगाया है।
बराक ओबामा ने सोमवार को फ़ॉक्स टीवी से बात करते हुए अपराधी ज़ायोनी शासन का समर्थन किया और कहा कि ईरान निरंतर उच्च स्तर पर इस्राईल विरोधी बयान देता रहता है जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इसी प्रकार अमरीका में अश्वेतों के साथ पुलिस के हिंसात्मक रवैये और उनके साथ अपनाए जाने वाले नस्लीय व्यवहार की ओर संकेत किए बिना दावा किया कि ईरान ने अपनी जनता का दमन और उसकी स्वतंत्रता को सीमित किया है।
अमरीकी राष्ट्रपति ने परमाणु मामले में भी दावा किया कि ऐसे स्पष्ट प्रमाण हैं जिनसे पता चलता है कि ईरान पहले परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर चुका है। ओबामा ऐसी स्थिति में ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं कि जब परमाणु ऊर्जा की अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी के निरीक्षकों ने सदैव अपनी रिपोर्टों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताया है। बराक ओबामा ने इसी प्रकार परमाणु वार्ता के बारे में भी दावा किया कि नवम्बर 2013 में बनने वाली सहमति ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण संभव हो सकी थी। यह ऐसी स्थिति में है कि जब ईरान ने प्रतिबंधों के काल में ही शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी-बड़ी उपलब्धियां अर्जित की हैं और वह क्षेत्र की एक बड़ी शक्ति में परिवर्तित हो चुका है जिसके कारण विवश हो कर बड़ी शक्तियां उसके साथ वार्ता कर रही हैं।