ईरान के बुज़ुर्ग मरजा-ए-तक़लीद ने इस्लामी उल्मा से ताकीद के साथ कहा है कि वह इस्लामी दुनिया से तकफीरी सोच का अंत करें।
रिपोर्ट के अनुसार ईरान के बुजुर्ग मरजा-ए-तक़लीद हज़रत आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी ने मुस्लिम उल्मा से अपील की है कि वह इस्लामी दुनिया से तकफीरी सोच का अंत करें ताकि निर्दोष इंसानों के क़त्ल व नरसंहार का सिलसिला बंद किया जाए।
हज़रत आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी ने अल-अज़हर मिस्र के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ईरान के प्रतिनिधि अहमद मुबल्लेग़ी के साथ बैठक में कहा कि अफ़सोस की बात है कि अभी भी इस्लामी दुनिया में तकफीरी सोच की किताबें कुछ स्कूलों में पढ़ाई जा रही है जिसका परिणाम मतभेद, आतंकवाद, हिंसा और क़त्ल व नरसंहार है और मुस्लिम उल्मा को चाहिए कि इस समस्या की समाधान के लिए उचित उपाय निकालें।
उन्होंने कहा कि जब तक कि इस्लामी देशों में आतंकवाद व तकफीरियत के कारण खत्म नहीं होगें हम लोग ऐसी घटनाओं को देखने पर मजबूर रहेंगे और उल्मा के कांधों पर इस मुद्दे के हवाले से सख्त जिम्मेदारी है।
हज़रत आयतुल्लाह सुबहानी ने इसी तरह ईरान के पवित्र शहर क़ुम और अल-अज़हर मिस्र में तकफीरी विचारधारा के विरूद्ध सम्मेलन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अफ़सोस की बात है इस समय क्षेत्र में दुश्मनों की वित्तीय मदद और समर्थन की वजह से आतंकवादी गुट निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे हैं इसलिए इस महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में मुस्लिम उल्मा ने हिस्सा लिया और उनके अत्याचारों व अपराधों की समीक्षा बहुत उपयोगी साबित हुई।
17 दिसंबर 2014 - 18:55
समाचार कोड: 659023
ईरान के बुज़ुर्ग मरजा-ए-तक़लीद ने इस्लामी उल्मा से ताकीद के साथ कहा है कि वह इस्लामी दुनिया से तकफीरी सोच का अंत करें।