16 दिसंबर 2014 - 12:05
 अहलेबैत की मुहब्बत इस्लामी समाज में एकता की धुरी।

ईरान में प्रमुख उलमा काउंसिल मजलिसे ख़ुबरेगाने रहबरी के सदस्य और तेहरान के इमामे जुमा ने अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के साथ मुसलमानों की मुहब्बत व प्यार और ख़ास लगाव को इस्लामी समाज में एकता की धुरी बताया है।

ईरान में प्रमुख उलमा काउंसिल मजलिसे ख़ुबरेगाने रहबरी के सदस्य और तेहरान के इमामे जुमा ने अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के साथ मुसलमानों की मुहब्बत व प्यार और ख़ास लगाव को इस्लामी समाज में एकता की धुरी बताया है।
इरना की के अनुसार ईरान में प्रमुख उलमा काउंसिल मजलिसे ख़ुबरेगाने रहबरी के सदस्य और तेहरान के इमामे जुमा आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ात्मी ने ईरान के दक्षिण में स्थित द्वीप कीश में इमाम हुसैन (अ) के चेहलुम के हिसाब से आयोजित प्रोग्राम में कहा कि इस्लाम के दुश्मन मुसलमानों की एकता को पारा पारा करने की कोशिश में हैं, लेकिन शिया व सुन्नी हमेशा से अहलेबैत अ. की छाया में शांति और अमन के साथ ज़िंदगी बिताते चले आये हैं।
आयतुल्लाह सैयद अहमद ख़ात्मी ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि दुश्मनों ने इस्लाम की बुनियाद को निशाना बना रखा है कहा कि आज दुश्मनों के लिए शिया व सुन्नी की चर्चा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दुश्मन सिरे से इस्लाम का विरोधी है। उन्होंने ईरानी राष्ट्र के अपमान के उद्देश्य से तेहरान के खिलाफ़ अमेरिका के कई वर्षों पर आधारित प्रतिबंधों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरानी क़ौम, अमेरिका और उसके सहयोगियों की उम्मीदों के विपरीत इन प्रतिबंधों के सामने नहीं झुकी बल्कि उसने प्रतिरोध किया क्योंकि ईरानियों का कल्चर, आशूराई और अपमान को स्वीकार न करने पर आधारित है।
आयतुल्लाह ख़ात्मी ने परमाणु वार्ता के समाधान के रास्ते में रूकावटें खड़ी किये जाने के बारे में कहा कि पश्चिमी देश अच्छी तरह जानते हैं कि ईरान परमाणु हथियारों के बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन वह चाहते हैं ईरान पर दबाव के साथ, अपने वर्चस्ववादी लक्ष्यों को हासिल करें, जिसमें वह कभी कामयाब नहीं होंगे।