इराक़ में पाई जाने वाली अशांति के बावजूद 60 मुल्कों के ज़ाएर करबला में मौजूद हैं।
अलआलम टीवी चैनेल के अनुसार आतंकवादियों के हर प्रकार के ख़तरों के बावजूद लाखों की संख्या में बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और पुरूष करबला पहुंच रहे हैं। इनमें बहुत बड़ी संख्या पैदल करबला जाने वालों की है। सिर्फ़ ईरान से कम से कम बारह लाख लोग करबला के लिए निकले हैं जिनकी संख्या में वृद्धि की संभावना पाई जाती है।
पिछले साल 30 मुल्कों के ज़ाएरीन करबला आए थे जबकि इस बार अबतक 60 मुल्कों के लोग करबला पहुंच चुके हैं। पिछले साल जहां अधिकतर लोग व्यक्तिगत रूप में करबला आए थे वहीं इस बार बड़े-बड़े गुटों में वे करबला पहुंचे हैं। ज़ाएरीन की सेवा करने के उद्देश्य से 75000 टीमें अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। सरकार ने ज़ाएऱीन को पहुंचाने के लिए 3000 बसों का इंतेज़ाम किया है जबकि कुछ अमीर लोगों ने 100 विमान चार्टर किये हैं जो विभिन्न हवाई अड्डों से ज़ाएरीन को करबला पहुंचा रहे हैं।
45000 अंजुमनों को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और हज़रत अब्बास के रौज़ों तक पहुंचाने का प्रबंध किया गया है। यह हज़ारों अंजुमनें 4 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करके इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और हज़रत अब्बास के रौज़ों तक पहुंचेंगी।
12 दिसंबर 2014 - 15:55
समाचार कोड: 657783
इराक़ में पाई जाने वाली अशांति के बावजूद 60 मुल्कों के ज़ाएर करबला में मौजूद हैं।