11 दिसंबर 2014 - 18:55
इमाम हुसैन के चेहलुम में शरीक होने के लिए उमड़ता सैलाब।

लाखों ज़ायरीन सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके इराक़ के शहरकरबला पहुंच रहे हैं ताकि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम के अवसर परउनके रौज़े में हाज़िर हो सकें।

लाखों ज़ायरीन सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके इराक़ के शहरकरबला पहुंच रहे हैं ताकि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चेहलुम के अवसर परउनके रौज़े में हाज़िर हो सकें।
शनिवार 13 दिसम्बर बराबर 20 सफ़र को शियों के तीसरे इमाम और उनकेवफ़ादार साथियों का चेहलुम है। दुनिया के कोने-कोने से करबला पहुंचने वालेलाखों लोग इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से अपने प्रेम का सुबूत दे रहे हैं। आजकल इराक़ का पवित्र शहर नजफ़े अशरफ़ दुनिया भर से इराक़ पहुंचने वालेज़ायरीनओं का केन्द्र बना हुआ है कि जो वहां से पैदल चलकर अपने दिलों केकाबे, करबला जाना चाहते हैं। नजफ़ से करबला तक का मार्ग महत्वपूर्ण मार्गहै जिसके द्वारा ज़ायरीन पैदल चलकर करबला पहुंचते हैं। इराक़ पहुंचकरज़ायरीन अपनी ज़ियारत का आरम्भ हज़रत अली अलैहिस्सलाम के रौज़े से करतेहैं।
करबला पैदल चलकर जाना किसी एक समुदाय से विशेष नहीं है, शियों के अलावादुनिया भर से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चाहने वाले इस विशाल रैली में भागलेते हैं और अपनी एकता एवं एकजुटता दर्शाते हैं। ऐसी स्थिति में कि जबइराक़ आतंकवादी घटनाओं से जूझ रहा है, यह विशाल रैली जिसकी महानता औरविशालता शब्दों में बयान नहीं की जा सकती, हर व्यक्ति के लिए आश्चर्य काकारण है। यह विशाल रैली दुनिया की सबसे महान एवं विशाल रैली है जिसमें लोगअपनी आस्था और स्वेच्छा से शिरकत करते हैं। इन लाखों लोगों का प्रेरणास्रोत पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के नाती इमामहुसैन अलैहिस्सलाम से प्रेम और उनकी शहादत का सोग मनाने का उत्साह है।