30 नवंबर 2014 - 20:14
 सुलैमानी पहले अमरीका से लड़े, अब आईएसआईएल को कुचल रहे हैः न्यूज़वीक

अमरीकी पत्रिका न्यूज़वीक ने ईरान के प्रसिद्ध सैन्य कमान्डर क़ासिम सुलैमानी की तस्वीर को अपने कवर पेज पर छापते हुए सुर्ख़ी लगायी है कि वह पहले अमरीका से लड़े और अब आईएसआईएल को कुचल रहे हैं।

अमरीकी पत्रिका न्यूज़वीक ने ईरान के प्रसिद्ध सैन्य कमान्डर क़ासिम सुलैमानी की तस्वीर को अपने कवर पेज पर छापते हुए सुर्ख़ी लगायी है कि वह पहले अमरीका से लड़े और अब आईएसआईएल को कुचल रहे हैं।
अलआलम टीवी चैनल के अनुसार न्यूज़वीक ने अपनी रिपोर्ट में कमान्डर क़ासिल सुलैमानी को प्रतिशोध की देवी कहा है कि जिसका उल्लेख यूनान की पौराणिक कथाओं में मिलता है। जैसा कि यूनान की पौराणिक कथाओं में अच्छाई, बुराई, न्याय, प्रतिशोध, और धोखा देने वाले प्रेमियों, क़ानून का उल्लंध करने वालों और घमंडियों को दंडित करने वाली, देवी का उल्लेख मिलता है।इन दिनों इराक़ के आमिरली, जरफ़ुस्सख़र, जलूला सहित अन्य इलाक़ों के तकफ़ीरी आतंकवादियों के अस्तित्व से पाक होते ही क़ासिम सुलैमानी की तस्वीरें साइबर स्पेस पर प्रकाशित हो जाती हैं। इन तस्वीरों में इराक़ी संघर्षकर्ताओं व जियालों के साथ हाजी क़ासिम सुलैमानी मुस्कुराते हुए नज़र आते हैं। अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी उनके बारे में कहता है, “ वह ख़तरनाक सीज़र है। वह हर जगह है भी नहीं भी है।” क़ासिम सुलैमानी दुश्मन के लिए जितना ख़तरनाक हैं दोस्तों के साथ उतना ही मेहरबान हैं।
न्यूज़वीक ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में सद्दाम शासन के पतन के बाद इराक़ के हालात की प्रक्रिया के बारे में लिखा, “ ईरानियों ने अपनी क़ुद्स ब्रिगेड के कमान्डर व स्ट्रेटिजिक मामलों के रणनैतिकार को इराक़ भेजा है। ऐसा व्यक्ति जिसे बहुत से सेना कमान्डर बड़ा रणनैतिकार मानते हैं। हालांकि सुलैमानी आम तौर पर सामने नहीं आते लेकिन पिछले सितंबर में आमिरली की आज़ादी के वक़्त अपनी तस्वीर लेने की इजाज़त दे दी। यह पश्चिम के लिए संदेश था कि इराक़ में ईरान मौजूद है।”
इस रिपोर्ट में आया है एक इराक़ी राजनेता क़ासिम सुलैमानी के बारे में कहता है, “ वह आम तौर पर बग़दाद और उत्तरी इराक़ में मौजूद रहते हैं। इराक़ सरकार इस बात को जानती है। सुलैमानी बहुत बुद्धिमान है और वह अपनी जंगी सलाहियत को भी जानते हैं।”
न्यूज़वीक के अनुसार, इराक़ियों का मानना है कि इराक़ में ईरान की उपस्थिति की ओर से चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। इराक़ी सांसद व इराक़ के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुवफ़्फ़क़ अर्रूबैई इस संदर्भ में कहते हैं, “ वह कौन व्यक्ति है जो मूसिल के पतन के सिर्फ़ तीन दिन के अंदर इराक़ियों की मदद को दौड़ा?” मुवफ़्फ़क़ अर्रुबैई कहते हैं, “ इस बात में शक नहीं कि अमरीकी नहीं थे। उन्होंने तीन महीने के बाद हवाई हमले किए और वह भी जब उनके अपने नागरिकों के सिर काटे गए। जबकि ईरानियों ने इराक़ की केन्द्र सरकार की अपील के एक दिन के अंदर जवाब दिया।”
ब्लूमबर्ग न्यूज़ नेटवर्क इस बारे में लिखता है, “ ट्वीटर और दूसरी सोशल साइटों पर सुलैमान की प्रकाशित तस्वीरों में सुलैमानी दाढ़ी रखे हुए नज़र आते हैं कि जिनके खिचड़ी की तरह काले और सफ़ेद बाल हैं। वह ज़्यादातर कैमरे के सामने मुस्कुराते नज़र आते हैं जैसे कोई पर्यटक छुट्टी बिता रहा हो और उन्हें अपने साथ के लोगों के हाथ में मौजूद क्लाशिन्कोफ़ से कोई चिंता नहीं रहती।”सी एन एन ने भी एक रिपोर्ट में बल दिया कि सादिक़ ख़र्राज़ी ने भी क़ासिम सुलैमानी के बारे में कहा कि वह वही शख़्स है जिसके बारे में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक़ के नए प्रधान मंत्री से कहा है, “ वह मेरे दुश्मन हैं लेकिन मैं उनका सम्मान करता हूं। काश अमरीकी सैन्य कमान्डरों में एक ही उनके जैसा होता।”
अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से कहा है कि वह एक बार क़ासिम सुलैमानी से मिलना चाहते हैं।पता नहीं अगर ईरान की मदद न होती तो इराक़ का क्या हाल होता? इस बात से फ़र्क़ नहीं पड़ता कि क़ासिम सुलैमानी इराक़ में आईएसआईएल के ख़िलाफ़ कार्यवाही में सीधे तौर पर शामिल रहें या इराक़ी कमान्डरों को सलाह-मशविरा दें। इस बात से भी फ़र्क़ नहीं पड़ता कि क़ासिम सुलैमानी इराक़ी सेना के कमान्डर रहें या ईरानी सेना के कमान्डर रहें। जो बात अहम है वह यह कि कमान्डर सुलैमानी की रणक्षेत्र में उपस्थिति और आईएसआईएल के ख़िलाफ़ संघर्ष में उनकी सफलताएं, क्षेत्र के देशों के लिए यह संदेश है कि क्षेत्र के बाहर की सेना, तकफ़ीरियों और आतंकवादियों से निपटने का हल नहीं है। क्षेत्रीय देश भी इराक़ी अधिकारियों की भांति इस बात को समझ लें कि एकता और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करके क्षेत्र में आतंकवाद की बुराई से निपटें।