30 नवंबर 2014 - 19:36
 आईएस के भारतीय आतंकी के हाथ रंगे हैं 55 लोगों के ख़ून से

ग्रेटर मुंबई से तकफ़ीरी आतंकवादी गुट आईएसआईएल के एक किराए के लड़ाके को भारत की ख़ुफ़िया जांच एजेंसी ने तुर्की में पूछताछ के बाद गिरफ़्तार कर लिया। भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार इस व्यक्ति पर 55 लोगों की हत्या का संदेह है और उसने आईएसआईएल को कथित तौर पर इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसे पर्याप्त पैसे नहीं मिल रहे थे।

ग्रेटर मुंबई से तकफ़ीरी आतंकवादी गुट आईएसआईएल के एक किराए के लड़ाके को भारत की ख़ुफ़िया जांच एजेंसी ने तुर्की में पूछताछ के बाद गिरफ़्तार कर लिया। भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार इस व्यक्ति पर 55 लोगों की हत्या का संदेह है और उसने आईएसआईएल को कथित तौर पर इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसे पर्याप्त पैसे नहीं मिल रहे थे।
भारत के आतंकवाद निरोध स्कवाएड एटीएस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए और गुप्तचर ब्यूरो आईबी के अधिकारी इस्तंबोल पहुंचे ताकि कल्याए शहर के निवासी अरीब मजीद को हिरासत में ले सकें। मिड-डे ने एक एयरपोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह रिपोर्ट दी।
आठ घंटे की पूछताछ के बाद अधिकारियों ने इस संदिग्ध को नेश्नल जांच एजेंसी के हवाले कर दिया। अरीब मजीद को शनिवार को अदालत में पेश किया गया जहां जज ने उसे 8 दिसंबर तक नेश्नल जांच एजेंसी एन आई ई की निगरानी में रहेगा।
अरीब मजीद के इराक़ में आईएसआईएल तक पहुंचने और किस प्रकार की हमलों में वह शामिल था, इस बारे में अलग अलग प्रकार की रिपोर्टें आ रही हैं। एक वरिष्ठ गुप्तचर ब्यूरो आईबी के अधिकारी ने कहा, “ उस पर आईएसआईएल के सदस्य के रूप में लगभग 55 लोगों की हत्या का संदेह है और वह इसलिए स्वेदश लौट आया क्योंकि उसे इस आतंकवादी गुट की ओर से पर्याप्त पैसा नहीं मिल रहा था।”
कुछ दूसरे मीडिया इसकी विपरीत रिपोर्ट दे रहे हैं। अज्ञात सूत्रों के हवाले से द हिन्दुस्तान टाइम्ज़ ने कहा कि आईएसआईएल ने मजीद को इलाज के लिए 2 हज़ार डॉलर दिए हैं क्योंकि वह इराक़ में लड़ाई के दौरान घायल हो गया था। अगर इस बात में सच्चाई है तो स्थानीय अधिकारियों को इस बात का संदेह है कि आईएसआईएल ने मजीद को भारत किसी ख़ास उद्देश्य के लिए भेजा है।
भारत की केन्द्रीय आतंकवाद निरोधक संस्था के एक अधिकारी ने कि जिसके नाम का उल्लेख नहीं किया गया है, कहा, “ मजीद की ओर से बतायी गयी बातों पर संदेह करने का हमारे पास तर्क है। उसे न सिर्फ़ यह कि आईएसआईएल ने पैसे दिए बल्कि उसे आईएसआईएल ने अपने नियंत्रण वाले इलाक़े से जाने की इजाज़त भी दी। इस बात की भी संभावना है कि उसने आईएसआईएल के कहने पर अपने बाप से भी संपर्क किया हो। हमें उसे सारे दावों की जांच करनी होगी। इसलिए एन आई ए को उसके ख़िलाफ़ केस दायर करने की इजाज़त दी गयी है।”
मजीद आईएसआईएल में कैसे शामिल हुआ
डीएनए-इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अरीब मजीद ने आईएसआईएल की तरफ़ से लड़ने से पहले कल्याण में रह कर 20 हज़ार से ज़्यादा तकफ़ीरी आतंकवादी वेबसाइटों को देखा था। मजीद ने अपने तीन साथियों के साथ इराक़ जाने का फ़ैसला किया ताकि तकफ़ीरी आतंकवादी गुट में शामिल हो सके।
द हिन्दुस्तान टाइम्ज़ ने एक और अधिकारी के हवाले से कहा, “ मजीद ने जांचकर्ताओं को बताया कि आईएसआईएल सभी रंगरूटों की भर्ती ऑनलाइन करता है। इसके खोजी तकफ़ीरी वेबसाइट देखते हैं और संभावित रंगरूट से सोशल मीडिया साइट के ज़रिए संपर्क बनाते हैं। इस तरह आईएसआईएल ने उससे संपर्क किया।