संयुक्त राष्ट्र संघ ने जेल में क़ैदियों को यातनाएं देने, पुलिस के बल प्रयोग और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ पुलिस के हिंसक व्यवहार के कारण अमरीका की कड़ी आलोचना की है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के यातना निरोधी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में निहत्थे अश्वेत किशोर को गोली मारने, कठोर ढंग से पूछताछ और अमरीका में काल कोठरियों के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल की ओर इशारा करते हुए कहा है कि अमरीका ने अंतर्राष्ट्रीय यातना निरोधी आयोग को दी गई प्रतिबद्धताओं के अनुसार काम नहीं किया है। इस आयोग ने 2006 के बाद यातना रोकने में अमरीका के रेकार्ड की समीक्षा ऐसी स्थिति में की है जब अमरीकी सरकार को एक अश्वेत किशोर की हत्या के मामले में एक श्वेत पुलिस अधिकारी को दोष मुक्त करने के ग्रैन्ड ज्यूरी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जनाक्रोश का सामना है।
अमरीका में पिछली ग्रीष्म ऋतु में मिसूरी राज्य के फ़र्गूसन शहर में एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने अश्वेत किशोर माइकल ब्राउन को गोली मार कर हताहत कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र संघ के यातना निरोधी आयोग ने बंदियों के साथ दुराचार, कुछ जेलों में गर्भवती महिलाओं को बेड़ियां पहनाने, नस्लभेदी व्यवहार और इसी प्रकार मृत्युदंड के समय बंदी को लंबे समय तक होने वाले पीड़ा के एहसास पर चिंता जतायी। रिपोर्ट में, गिरफ़्तारी का विरोध करते समय पुलिस द्वारा निहत्थे लोगों के ख़िलाफ़ टेज़र के निरंतर प्रयोग की आलोचना की गई है और कहा गया है कि जान के ख़तरे या गंभीर रूप से ख़ुद को चोटिल होने से बचाने के लिए ही टेज़र के इस्तेमाल की इजाज़त है।संयुक्त राष्ट्र संघ के यातना निरोधी आयोग ने क्यूबा के ग्वांतानामो द्वीप में स्थित अमरीकी जेल में संदिग्ध आतंकवादियों के साथ दुर्व्यवहार व यातना के दावे की पूरी समीक्षा में अमरीका की ओर से निरंतर अनदेखी और इसी प्रकार अहम बंदियों को यातना दिए जाने के विशेष तरीक़े की निंदा की जिससे अहम क़ैदियों को दी जाने वाली यातनाओं से आम लोग अवगत नहीं हो पाते।संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति में कि जिसका मुख्यालय जेनेवा में है, दस विशेषज्ञ सभी 156 देशों के रेकार्ड पर नज़र रखते हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देश के नाते यातना निरोधी, हर प्रकार के अत्याचारपूर्ण व अमानवीय व्यवहवार, तथा अपमानजनक दंड न देने के समझौते पर दस्तख़त किए हैं।
29 नवंबर 2014 - 18:39
समाचार कोड: 654903
संयुक्त राष्ट्र संघ ने जेल में क़ैदियों को यातनाएं देने, पुलिस के बल प्रयोग और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ पुलिस के हिंसक व्यवहार के कारण अमरीका की कड़ी आलोचना की है।