29 नवंबर 2014 - 06:08
अल्लामा शेख़ नवाज़ इरफानी नाकाबिल फरामोश व्यक्तित्व / इस्लामाबाद में नमाज़े जनाज़ा के बाद जनाज़ा पाराचिनार रवाना + तस्वीरें

पारा चिनार की केंद्रीय जामा मस्जिद के पेश इमाम और मदरसा जाफ़रिया, पारा चिनार के क्यूरेटर अल्लामा शेख़ नवाज़ इरफानी को पिछले रात अज्ञात लोगों ने केंद्रीय राजधानी में गोलीबारी कर शहीद कर दिया

अहले बैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार पारा चिनार की केंद्रीय जामा मस्जिद के पेश इमाम और मदरसा जाफ़रिया, पारा चिनार के क्यूरेटर अल्लामा शेख़ नवाज़ इरफानी को पिछले रात अज्ञात लोगों ने केंद्रीय राजधानी में गोलीबारी कर शहीद कर दिया, अल्लामा नवाज़ इरफानी का मूल संबंध गिलगित बलतिस्तान घाटी हनज़ह के क्षेत्र मुर्तज़ा आबाद से था, जहां इनका जन्म 1967 में हुआ, इस क्षेत्र से आपका परिवार पलायन करके दीनियोर में आबाद हो गया, आपने प्राथमिक दीनी तालीम जामिअतुल मुन्तज़र लाहौर से प्राप्त की, प्रारंभिक दीनी तालीम पाकिस्तान से प्राप्त करने के बाद आप क़ुम ईरान तशरीफ़ ले गए, जहां से विभिन्न उलूम दीनी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1996 में पाकिस्तान लौटेआपने धर्म की सेवा के लिए पाराचनार जैसे संवेदनशील और जटिल क्षेत्र को चुना और मदरसा जाफ़रिया पाराचनार जिसकी नींव शेख रजब अली ने रखी थी और बाद में उसे शेख अली मदद ने आगे चलाया, इस मदरसा में शिक्षक के रूप में सेवा देना शुरू कीं।
उस ज़माने में पाराचनार दुश्मनाने अहले बैत (अ) का केन्द्र था, और वहाँ के शियों को तालिबानी आक्रमण का सामना करना पड़ता था, उस समय शेख नवाज़ इरफानी ने एक निडर और मुजाहिदे आलिम दीन होने का सबूत दिया और पारा चिनार के शियों को आक्रामक शक्ति के खिलाफ डट जाने का दर्स दिया, जिस पर सरकार ने आपको क़ैद कर दिया, रिहाई के बाद 2002 में अल्लामा शेख़ अली मदद के बाद अल्लामा नवाज़ इरफानी ने मदरसा जाफ़रिया पाराचनार की पूरी बागडोर संभाली, संस्था को भरपूर तरीके से चलाया और मकतबे अहले बैत की सेवा में आगे रहे, जिसके कारण सरकार ने आपको इलाक़े से निकाल दिया और मदरसए जाफ़रिया पर पाबंदी लगा दी गई। पाराचनार की जनता लंबे समय से प्रयासरत थी कि वह अपने हर दलिज़ीज़ नेता को वापस पारा चिनार लासके, शहीद अल्लामा नवाज़ इरफानी की वसीयत के अनुसार उन्हें पारा चिनार में दफ़्न किया जाएगा। उधर अपने महबूब नेता के अंतिम दर्शन के लिए लोग गिरोह दर गिरोह केंद्रीय मस्जिद पारा चिनार पहुंचना शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि शेख नवाज़ इरफानी की हत्या से राष्ट्र एक महान नेता और धर्म की सेवा करने वाले ईमानदार आलिमे दीन से वंचित हो गया है। मुजाहिद आलिमे दीन अल्लामा नवाज़ इरफानी की सेवाएं हमेशा याद रखी जाऐंगी।
उनकी शहादत के दुखद घटना पर गहरा दुख और शोक व्यक्त करते हुए मजलिसे वहदते मुसलमीन खैबर पख्तूनख्वा के महासचिव अल्लामा सिब्तैन हुसैनी ने कहा कि केंद्रीय राजधानी में ऐसी घटनाओं का घटित होना राज्य की विफलता की मुँह बोलती तस्वीर है, उन्होंने इस दुखद घटना की जोरदार निंदा करते हुए कहा कि इस्लामाबाद में सभी सुरक्षा एजेंसियों की नाक तले एक शिया आलिमे दीन की हत्या उनके संस्थानों के प्रदर्शन पर सवालिया निशान है। उनका कहना था कि घटना की जिम्मेदारी प्रतिबंधित जमात लश्करे-झंगवी ने स्वीकार कर ली है, अब राज्य को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस गिरोह के खिलाफ भरपूर सैन्य अभियान शुरू करना चाहिए
प्रमुख आलिमे दीन और पाराचनार का हर दिल अजीज व्यक्तित्व अल्लामा शेख़ नवाज़ इरफानी की नमाज़ जनाज़ा आज अदा कर दी गई। नमाज़े जनाज़ा जी नाइन कराची कंपनी जामा इमाम अलसादिक में अल्लामा शफ़ा नजफ़ी ने पढ़ाई, अल्लामा नवाज़ इरफानी को पिछले रात सेक्टर ई इलेवन में तकफीरियों ने फायरिंग कर हत्या कर दी थी। मरहूम को सर और सीने में दो गोलियां लगीं। अल्लामा नवाज़ इरफानी की हत्या के खिलाफ आज तीन बजे नेशनल प्रेस क्लब के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया गया। दूसरी ओर थाना गोलड़ह में मरहूम के बेटे की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है।