28 नवंबर 2014 - 19:07
 मिस्र, क़ुरआन के साथ प्रदर्शन, हंगामा और विरोध

मिस्र के सुरक्षा अधिकारियों ने सलफ़ियों की ओर से घोषित विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना को अलर्ट कर दिया है।

मिस्र के सुरक्षा अधिकारियों ने सलफ़ियों की ओर से घोषित विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना को अलर्ट कर दिया है।
क़ाहिरा से अल आलम टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार मिस्र के सलफ़ी गुट की ओर से शुक्रवार को घोषित विरोध प्रदर्शनों बाद देश के सुरक्षा बलों को अलर्ट कर दिया गया। मिस्र के सलफ़ी गुट ने अपने समर्थन से अह्वान किया है कि वह शुक्रवार को अपने हाथों में पवित्र क़ुरआन लेकर विरोध प्रदर्शन करें।
मिस्र के कुछ राजनैतिक दलों ने इस अपील का विरोध करते हुए इसे हिंसक प्रदर्शन की संज्ञा दी है। मिस्र के सलफ़ी गुट ने समस्त मिस्र वासियों को इन प्रदर्शनों में भाग लेने अह्वान किया है और प्रदर्शनकारियों से कहा है कि वे सुरक्षा बलों से मुक़ाबले के लिए अपने हाथों में पवित्र क़ुरआन रखे रहें।
प्रदर्शन की घोषणा के बाद सुन्नी मुसलमानों के सब से बड़े शैक्षिक केन्द्र मिस्र के अलअज़हर विश्वविद्यालय ने इस देश में विरोधियों को 28 नवंबर को पवित्र क़ुरआन को हाथ में लेकर प्रदर्शन करने से मना करते हुए कहा है कि 28 नवंबर को क़ुरआन हाथ में लेकर प्रदर्शन करना, सिफ़्फ़ीन के षड्यंत्र की याद दिलाता है जिसने इस्लामी जगत को सबसे भारी नुक़सान पहुंचाया था।
इस बारे में अधिक पढ़ेंः क़ुरआन हाथ में लेकर प्रदर्शन, सिफ़्फ़ीन में मुआविया जैसा षड्यंत्र हैः अलअज़हर
मिस्र की सलफ़ी पार्टी नूर ने सलफ़ी गुट की इस मांग को रद्द करते हुए कहा है कि इससे हिंसा में वृद्धि होगी और बहुत अधिक लोग मारे जाएंगे। नूर पार्टी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को अल आलम टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि 28 नवंबर को होने वाले प्रदर्शनों में हम भाग नहीं लेंगे क्योंकि हमारी दृष्टि में सलफ़ी गुट की यह कार्यवाही उकसाने वाली कार्यवाही है जिसके लक्ष्य केवल हिंसा और झड़पों को बढ़ावा देना है और यह हमारे लक्ष्य के विरुद्ध है।
मिस्र के छह अप्रैल नामक आंदोलन ने भी एक प्रेस कांफ़्रेंस में यह घोषणा कर दी कि उनके कार्यकर्ता और समर्थन इन प्रदर्शनों में भाग नहीं लेंगे। आंदोलन का कहना है कि यह प्रदर्शन सांप्रदायिक और 25 जनवरी की क्रांति के लक्ष्यों के विरुद्ध है। छह अप्रैल आंदोलन की राजनैतिक शाखा के सदस्य मुहम्मद कलाम ने अल आलम टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि यह संभव नहीं है कि हम सांप्रदायिक मांगों का उत्तर दें और प्रदर्शनों में भाग लें क्योंकि इससे मिस्री समाज बिखराव का शिकार हो जाएगा।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि प्रदर्शनों के आयोजन से हिंसा में वृद्धि की आशंका है और शुक्रवार को होने वाला प्रदर्शन मिस्री राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह सीसी की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कड़ी परीक्षा है। मिस्र के स्थानीय पत्रकार ने हुसाम अबुल अला ने अल आलम टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि यह मिस्र में सुरक्षा की स्थापना के लिए सीसी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा है और हमें आशा है कि यह चरण भी शांति पूर्ण ढंग से संपन्न होगा और कोई जानी व माली नुक़सान न हो।
मिस्र की पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा था कि क़ाहिरा, तहरीर, नहज़ा और राबेउल अदवीया जैसे समस्त स्क्वायरों को बंद कर दिया गया है और सेना ने सलफ़ी गुट के नेताओं के को गिरफ़्तार करने का क्रम जारी है।
दूसरी ओर मिस्र के एक सलफ़ी प्रचारिक ने अलअज़हर विश्वविद्यालय से मांग की है कि वह मिस्र के सुरक्षा बलों को पवित्र पर पांव धरने की अनुमति का फ़तवा दे। सलफ़ी प्रचारक मज़हर शाहीन ने यह बात अलमहवर टीवी चैनल पर कही। मज़हर शाहीन का कहना थ कि निश्चित रूप से यह फ़तवा दिया जाए कि मिस्री सुरक्षा बल, 28 नवंबर को पवित्र क़ुरआन उठाकर होने वाले प्रदर्शनों के दौरान, झड़पें आरंभ होने की स्थिति में पवित्र क़ुरआन पर पांव रखकर चल सकें।
सलफ़ी प्रचारक ने यह बात, पूछे गये इस प्रश्न के उत्तर में कि यदि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र क़ुरआन को ज़मीन पर रख दिया तो क्या सुरक्षा बलों के लिए यह वैध है कि वह पवित्र क़ुरआन पर पांव रखकर प्रदर्शनकारियों का पीछा करें, सलफ़ी प्रचारक ने कहा कि हां वैध है। मज़हर शाहीन ने कहा कि अलअज़हर विश्वविद्यालय के फ़तवा विभाग ने भी प्रदर्शनकारियों के मुक़ाबले में मिस्री सुरक्षा बलों का समर्थन किया है।