योरोपीय संघ के सांसदों ने पूर्वी फ़्रांस के स्ट्रॉस्बर्ग में योरोपीय संघ की संसद में फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने से संबंधित बहस के दौरान इस्राईल की आलोचना की।
प्रेस टीवी के अनुसार इस मुद्दे पर अगले महीने होने वाले मतदान के दौरान योरोपीय सांसदों का भरपूर समर्थन मिलेगा। योरोपीय संघ के सांसदों का मानना है कि योरोपीय संघ की ओर से फ़िलिस्तीन को अलग राज्य के रूप में मान्यता देने से इस्राईल को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि अवैध तरीक़े के ज़मीन पर क़ब्ज़ा और फ़िलिस्तीनियों की हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
योरोपीय संघ की संसद में ब्रितानी संसाद रिचर्ड होविट ने गुरुवार को कहा, योरोपीय संघ को क्यों क़दम उठाना चाहिए? क्योंकि इस्राईल द्वारा निरंतर घरों के निर्माण से बेचैनी और निरंतर मौत के कारण निराशा है।
योरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रिका मोगरिनी ने जो इस बहस में मौजूद थीं, इस्राईल और फ़िलिस्तीनियों से सीधी बातचीत शुरु करने की अपील की है। मोगरिनी ने कहा, “ अगर फ़िलिस्तीनी राज्य नहीं होगा तो सुरक्षा क़ायम नहीं हो सकती, और फ़िलिस्तीनी राज्य उस वक़्त तक नहीं हो सकता जब तक हम इस्राईल को शांति, सुरक्षा और स्थिरता की गैरंटी न दें।”
योरोपीय संघ के कुछ सदस्य देशों ने ग़ज़्ज़ा पर हाल में इस्राईल द्वारा थोपे गए पचास दिवसीय युद्ध के ख़िलाफ़ इस संघ के क़दम उठाने में नाकाम रहने की आलोचना की। इस युद्ध में 2140 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी शहीद हुए जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की थी।
योरोपीय संघ ने सभी सदस्य देशों से फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने की अपील की है और इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा के निर्णय के अनुरुप कहा है।
पिछले महीने स्वीडन पहला योरोपीय देश था जिसने फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देते हुए फ़िलिस्तीनियों के आत्म-निर्धारण के अधिकार की पुष्टि की। हंगरी, स्लोवाकिया और पोलैंड उन 130 देशों में शामिल हैं जो पहले ही फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे चुके हैं।
फ़िलिस्तीनी पश्चिमी तट, पूर्वी अलक़ुद्स और नाकाबंदी से घिरे ग़ज़्ज़ा पर आधारित फ़िलिस्तीनी राज्य स्थापित करना चाहते हैं। इसी प्रकार वे सभी अतिग्रहित इलाक़ों से इस्राइली सैनिकों के बाहर निकलने की मांग करते हैं। अलक़ुद्स का इस्राईल ने जिसे वह जेरुसलम कहता है, 1967 की युद्ध में अतिग्रहण कर लिया था।
28 नवंबर 2014 - 19:02
समाचार कोड: 654658
योरोपीय संघ के सांसदों ने पूर्वी फ़्रांस के स्ट्रॉस्बर्ग में योरोपीय संघ की संसद में फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने से संबंधित बहस के दौरान इस्राईल की आलोचना की।