25 नवंबर 2014 - 19:05
 इस्राईल ने अरब देशों में जासूसी की बात स्वीकारी

इस्राईल ने अरब देशों में जासूसी की बात स्वीकार की है।

इस्राईल ने अरब देशों में जासूसी की बात स्वीकार की है।
ज़ायोनी शासन के सुरक्षा शोध केन्द्र के प्रमुख ने बताया है कि इस शासन की गुप्तचर सेवा ने कई अरब देशों में अपनी पैठ बना ली है जिनमें मिस्र सर्वोपरि है। ज़ायोनी सेना की गुप्तचर सेवा के प्रमुख आमूस यदलीन के ने कहा है कि हमारी गुप्तचर सेवा ने मिस्र, ट्यूनीशिया, मोरक्को, इराक़, सूडान, यमन, लेबनान, लीबिया, फ़िलिस्तीन और सीरिया में अपनी पैठ बनाई है।
उन्होंने कहा कि हमने कुछ देशों में ऐसे चैनेल बना लिए हैं जो अपनी सूचनाएं ट्यूनीशिया में एकत्रित करते हैं। इस प्रकार वे अरब देशों की राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं और उन पर नकारात्मक या सकारात्मक प्रभाव डालने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र मिस्र है। यदीलन ने बताया कि हमारी गतिविधियों का आधार 1979 के कार्यक्रम से परिवर्तित होकर बहुत विस्तृत हो चुका है। इस इस्राईली अधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में सीना मरूस्थल मे युद्ध, इस्राईल के विरुद्ध नहीं है बल्कि वह मिस्र के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि मिस्री राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अस्सीसी, हमास को अपना कठोर शत्रु मानते हैं।