अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार गार्जियन काउंसिल के सचिव आयतुल्लाह जन्नती ने “कट्टरपंथी और तकफीरी आतंकवाद पर अंतर-राष्ट्रीय सम्मेलन” में बोलते हुए कहा: तकफीरी आतंकवाद का मुद्दा 100 प्रतिशत राजनीतिक समस्या है और यह (तकफीरी आतंकवादी) इस्लाम के नाम से मुसलमानों पर कड़ा प्रहार करना चाहते हैं। ईसाई और यहूदी विद्वानों को चाहिए कि इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लें इसलिए कि यह (तकफीरी) किसी पर दया नहीं करते, लोगों की सम्मान व मर्यादा से खिलवाड़ करते हैं और किसी भी चीज को महत्व नहीं देते हैं।
उन्होंने कहा कि जो इस्लाम,ईरान में प्रचलित है और अपनी उम्र के पैंतीस साल गुजार चुका है, यह इस्लाम दुनिया में पेश करने की ज़रूरत है। इस्लामी जागरूकता पूरी दुनिया में फैल रही है लेकिन अंतरराष्ट्रीय साम्राज्यवाद और तानाशाह शासक इससे खतरा महसूस करते हैं इसलिए कि इस्लामी जागरूकता उनकी जान के लिए खतरा है।
आयतुल्लाह जन्नती ने बल देकर कहा: उन लोगों की पूरी कोशिश यही है कि इस्लामी जागरूकता उपयोगी साबित न हो और वह देश जो इस्लामी जागरूकता का केंद्र हैं उनसे दुनिया को दूर किया जाये। सभी मुसलमानों पर वाजिब है कि वह तकफीरी आतंकवादियों के मुक़ाबले में उठ खड़े हों और कल्चरल काम करें।
ईरान की गार्जियन काउंसिल के सचिव ने कहा: इस्लामी देशों के जवानों को धोखा दिया गया है और वह सोच रहे हैं कि यह काम वह अल्लाह की ख़ुशी के लिए अंजाम दे रहे हैं, उनकी यह हरकत एक जेहादी हरकत है और वह लड़ते हैं ताकि मारे जायें और इस प्रकार से मरने को शहादत समझते हैं और यह इस तरह से शहीद होना चाहते हैं।
तेहरान के इमामे जुमा ने सम्मेलन में मौजूद मेहमानों को सम्बोधित करते हुए कहा: हमें तकफीरी आतंकवाद के खिलाफ़ कल्चरल काम करना होगा और इल्मी काम भी। केवल तर्क पर्याप्त नहीं है क्योंकि उनके सिरबुद्धि और तर्क को नहीं पहचानते। तार्किक बात उनकी खोपड़यों में नहीं घुसती। वह कभी भी तैयार नहीं होते कि मुस्लिम उलमा से बहेस करें।
उन्होंने अपने भाषण के अंत में इस सम्मेलन के आयोजकों ख़ास तौर पर आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी का आभार व्यक्त किया और सम्मेलन इस सम्मेलन में भाग लेने वाले मेहमानों का स्वागत किया और इस बात पर बल दिया कि इस संदेश को दुनिया वालों तक पहुँचा जाये।