बहरैन के प्रमुख विपक्षी दल ने देश में चुनावों के आयोजन को ख़ारिज करते हुए कहा है कि तानाशाही सरकार ने सुरक्षा बलों से मतदान करवाया है।
बहरैन के प्रमुख विपक्षी दल अल-विफ़ाक़ के नेता अली सलमान ने शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चुनाव में केवल 30 प्रतिशत वोट डाले गए और उसमें भी 80 प्रतिशत मतदाता पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी थे। अली सलमान ने इसे मनामा सरकार की बड़ी पराजय बताते हुए कहा कि जिस सरकार को जनता का समर्थन प्राप्त न हो उसे वैध नहीं माना जा सकता।
याद रहे कि देश के 5 प्रमुख दलों की ओर से चुनावों के बहिष्कार की घोषणा के बावजूद, शनिवार को 40 संसदीय सीटों के लिए मतदान कराया गया। बहरैन के सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने इसे तानाशाही सरकार का ढोंग क़रार देते हुए मांग की थी कि अल-ख़लीफ़ा शासन को चाहिए कि वह जनता की इच्छा का सम्मान करते हुए सत्ता से अलग हो जाए और देश में निष्पक्ष चुनावों का आयोजन हो।
बहरैन के प्रमुख विपक्षी दल ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर आले ख़लीफ़ा शासन इसी प्रकार जनता की उपेक्षा करता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब देश में स्थिति विस्फ़ोटक हो जाएगी।
23 नवंबर 2014 - 10:46
समाचार कोड: 653306
बहरैन के प्रमुख विपक्षी दल ने देश में चुनावों के आयोजन को ख़ारिज करते हुए कहा है कि तानाशाही सरकार ने सुरक्षा बलों से मतदान करवाया है।